Gullak Season 5 Review: ओटीटी की भीड़ में राहत की एक प्याली 'चाय' है 'गुल्लक' का पांचवां सीजन मनोरंजन एक घंटा पहले 3
जहां ज्यादातर इंडियन ओटीटी प्लेटफॉर्म डार्क क्राइम और हिंसक थ्रिलर से भरे हैं, वहीं TVF की 'गुल्लक' एक सीधी-सादी पारिवारिक कहानी के साथ सुकून देती है। अब इस चर्चित सीरीज का सीजन 5 भी दर्शकों के सामने आ चुका है।

आज जब अधिकांश भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म डार्क क्राइम ड्रामा, हिंसक गैंगस्टर कहानियों, गनप्ले और थ्रिलर वेब सीरीज से अटे पड़े हैं, ऐसे माहौल में 'गुल्लक' किसी शांत बदलाव की तरह सामने आई। द वायरल फीवर (TVF) की बनाई इस सीरीज ने यह साबित कर दिखाया कि किसी दिलचस्प और दिल को छू जाने वाली कहानी को कहने के लिए न तो खून-खराबे की जरूरत है, न सस्पेंस की और न ही किसी बड़ी साजिश की।

कई बार जिंदगी को खास बनाने के लिए बस एक परिवार, एक छोटा-सा घर और रोजमर्रा के अनगिनत मामूली पल ही काफी होते हैं। यही सादगी इस सीरीज की असली ताकत रही है। अब इसी कामयाब सीरीज का पांचवां सीजन भी आ चुका है।

ओटीटी के शोर के बीच एक अलग पहचान

जहां ज्यादातर वेब सीरीज दर्शकों को बांधे रखने के लिए तेज रफ्तार थ्रिल और रोमांच का सहारा लेती हैं, वहीं 'गुल्लक' ने इसके उलट रास्ता चुना। यह सीरीज आम मध्यमवर्गीय परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को इतनी सहजता से पर्दे पर उतारती है कि दर्शक खुद को उसमें देखने लगते हैं। यही वजह है कि इसे ओटीटी के शोर के बीच सुकून की एक 'चाय' जैसा कहा जाता है।

क्यों खास है पांचवां सीजन

चार सफल सीजन के बाद अब पांचवें सीजन की दस्तक के साथ दर्शकों की उम्मीदें एक बार फिर इस परिवार और उसके छोटे-छोटे किस्सों से जुड़ गई हैं। सीरीज की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह बिना किसी भारी-भरकम ताम-झाम के, रिश्तों और रोजमर्रा के पलों के जरिए सीधे दिल तक पहुंचती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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