Fish Farming: मछली पालन से समृद्ध हो रहे किसान, 90% अनुदान के साथ 2 लाख लागत पर 5 लाख की कमाई बिहार 3 महीने पहले 41
दरभंगा में वैज्ञानिक विधि से मछली पालन को बढ़ावा देने की नई पहल किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, जहां सरकार के 90% अनुदान के सहारे लगभग 2 लाख रुपये की लागत पर 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही है।

मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में दरभंगा जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। यहां वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। यह पहल मत्स्य निदेशालय, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार, बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (BAIP) तथा PRADAN संस्था के संयुक्त सहयोग से संचालित हो रही है। BAIP को इस काम के लिए गेट्स फाउंडेशन से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

इस व्यवसाय से जुड़े किसान प्रदीप बताते हैं कि उनका कुल खर्च करीब 2 लाख रुपये आने वाला है, जबकि आमदनी 5 लाख रुपये से ऊपर रहना तय है। उनके अनुसार यह कारोबार कम पूंजी में अच्छा लाभ देने वाला साबित हो रहा है।

बिक्री की भी कोई चिंता नहीं

प्रदीप का कहना है कि मछली बेचने को लेकर भी कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती। उनके शब्दों में, तालाब से मछली निकालिए, गाड़ी में लोड कीजिए और मंडी भेज दीजिए। यही नहीं, आसपास के व्यापारी खुद तालाब तक पहुंचकर मछली खरीद ले जाते हैं, जिससे बाजार ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

जयंती रोहू और अमृत कतला से नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि जयंती रोहू और अमृत कतला जैसी प्रजातियों के सहारे जिले का मत्स्य उत्पादन तेज गति पकड़ेगा। कम समय, कम लागत और अधिक उत्पादन का यही फार्मूला किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगा।

छोटे किसानों के लिए वरदान बना अनुदान

सरकार की ओर से दिया जा रहा 90% अनुदान छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं रह गए, बल्कि किसानों के लिए तैरते हुए मुनाफे का जरिया बन रहे हैं। जानकार मानते हैं कि दरभंगा का यह मॉडल पूरे बिहार के लिए एक मिसाल बन सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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