'चुनाव में बड़े-बड़े वादे, फिर कोई नहीं आता'—फरीदाबाद की सपेरा कॉलोनी में जलभराव और गंदगी से बेहाल लोग, बार-बार शिकायत पर भी सुनवाई नहीं हरियाणा एक घंटा पहले 3
फरीदाबाद के सोतई गांव की सपेरा कॉलोनी पिछले 10 से 12 साल से नालियों के अभाव, जलभराव और गंदगी से जूझ रही है। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान न होने से नाराज लोग अब जल्द नाली निर्माण और जल निकासी की मांग कर रहे हैं।

फरीदाबाद के सोतई गांव में बसी सपेरा कॉलोनी के लोग बीते 10 से 12 साल से गंदगी और जलभराव की दोहरी मार झेल रहे हैं। यह कॉलोनी सरकार की ओर से बसाई गई थी, लेकिन यहां आज तक नालियों की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। नतीजा यह है कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़कों पर बहता है और जगह-जगह कीचड़ व गंदगी के ढेर नजर आते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में हालात और भी बिगड़ जाते हैं। पानी भर जाने से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और छोटे बच्चों को स्कूल जाने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नालियों के न होने के कारण कीचड़, मच्छर और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

'कॉलोनी अब नर्क बन चुकी है'

कॉलोनी के निवासी सोनू बताते हैं कि वे इसी सपेरा कॉलोनी में रहते हैं, जहां हर ओर गंदगी का ढेर लगा रहता है। नालियां न होने के कारण पानी सड़कों पर बहता है और छोटे बच्चे गंदगी की वजह से बाहर खेल तक नहीं पाते। उनके मुताबिक कॉलोनी का पार्क भी नर्क जैसा हो चुका है।

सोनू का कहना है कि कुछ राहत पाने के लिए लोग अपने पैसों से मिट्टी डलवाते हैं। यह समस्या तभी से चली आ रही है जब से यहां प्लॉट काटे गए थे। उन्होंने बताया कि पार्षद प्रदीप टोंगर से कई बार शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई हल नहीं निकला।

एक नजर में कॉलोनी की समस्या

  • सबसे बड़ी दिक्कत: नालियों का न होना और सड़कों पर गंदा पानी भरना।
  • कब से परेशानी: करीब 10 से 12 साल से।
  • सबसे ज्यादा तकलीफ कब: बरसात के मौसम में।
  • शिकायत हुई या नहीं: हां, कई बार पार्षद और अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है।

बीमार पड़ रहे हैं बच्चे

स्थानीय निवासी वर्षा शर्मा का कहना है कि इस कॉलोनी में रहते हुए उन्हें 6 से 7 साल हो गए हैं। गंदगी के चलते आए दिन झगड़े होते रहते हैं—जिन घरों का पानी बाहर बहता है, उनसे विवाद हो जाता है। नालियां न बनने से परेशानी बढ़ती जा रही है।

वर्षा बताती हैं कि कॉलोनी में छोटे-छोटे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उनके अपने बच्चे भी पिछले चार दिनों से बुखार से जूझ रहे हैं और उन्हें लगातार दवाई देनी पड़ रही है।

'मूलभूत सुविधाओं का अभाव'

कॉलोनी में किराने की दुकान चलाने वाले प्रदीप पुजारी कहते हैं कि उनकी दुकान के ठीक सामने गंदगी फैली रहती है, जिससे सामान लेने आने वाले बच्चों को भी दिक्कत होती है। उनके अनुसार कॉलोनी के भीतर बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता हाथ जोड़कर आते हैं, लेकिन बाद में कोई नजर नहीं आता।

स्थानीय निवासी पुष्पा बताती हैं कि गंदगी इतनी ज्यादा है कि मच्छरों ने जीना दूभर कर दिया है और हर समय बीमारी फैलने का डर बना रहता है।

'गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं'

कॉलोनी निवासी चमन लाल चौहान का कहना है कि उन्हें यहां रहते हुए 12 से 13 साल हो चुके हैं। यह कॉलोनी सरकार ने बसाई थी, लेकिन नालियों की कोई व्यवस्था नहीं है। उनका दर्द है कि गरीब लोगों की कोई नहीं सुनता—हर चुनाव में वादे तो होते हैं, मगर काम आज तक नहीं हुआ।

कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन मतदान खत्म होते ही कोई हालचाल पूछने तक नहीं आता। सालों से एक ही समस्या बनी रहने के बावजूद जिम्मेदार विभाग की चुप्पी से लोगों में साफ नाराजगी दिखती है।

लोगों की मांग

सपेरा कॉलोनी के निवासियों की मांग है कि जल्द से जल्द नालियों का निर्माण कराया जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या से उन्हें राहत मिल सके। लोगों ने आगाह किया है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले बरसात के मौसम में हालात फिर से गंभीर हो जाएंगे।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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