सब्जी बेचकर बच्चों का भविष्य संवारा, पर बेटे-बहू ने चप्पलों से पीटा, वृद्धाश्रम पहुंची मां की दास्तान हरियाणा एक घंटा पहले 2
85 वर्ष की केसर अम्मा ने जिंदगीभर मेहनत कर बच्चों को पाला और शादियां कराईं, मगर बुढ़ापे में बेटे, बहू और पोते की मारपीट सहकर उन्हें फरीदाबाद के वृद्धाश्रम में पनाह लेनी पड़ी। आज यही आश्रम उनका नया घर बन गया है, जहां उन्हें सम्मान और सुकून मिल रहा है।

कहा जाता है कि जिस बुजुर्ग का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं होता, उसके लिए वृद्धाश्रम ही आखिरी ठिकाना बन जाता है। ऐसी ही एक बूढ़ी मां की कहानी आज सामने आई है, जिसे सुनकर हर किसी का मन औलाद के बर्ताव पर भारी हो जाएगा।

जिस मां ने पूरी जिंदगी कड़ी मेहनत करके परिवार को खड़ा किया, बच्चों को पाला-पोसा, उनके लिए घर बनवाया, शादियां कराईं और एक-एक रुपया जोड़कर उनका आने वाला कल संवारने में लगा दिया, आज उसी 85 साल की मां को अपने ही घर में दो गज जगह नसीब नहीं हुई। जिस उम्र में उन्हें सेवा और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी उम्र में बेटे, बहू और पोते ने मारपीट कर उन्हें घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। केसर अम्मा अब फरीदाबाद के ताऊ देवी लाल वृद्धाश्रम में अपने बाकी दिन गुजार रही हैं।

घर से वृद्धाश्रम तक का सफर

अपनी आपबीती सुनाते हुए केसर बताती हैं कि उनकी उम्र 85 साल है और वे मूल रूप से गाजियाबाद के मोहन नगर की रहने वाली हैं। पिछले चार महीने से वे फरीदाबाद के इस आश्रम में रह रही हैं। इससे पहले भी वे यहीं रही थीं, तब उनका पोता उन्हें यहां से अपने साथ घर ले गया था।

केसर के मुताबिक, पोते ने वादा किया था कि अब वह उन्हें नहीं मारेगा, लेकिन घर पहुंचते ही उसने फिर वही सिलसिला शुरू कर दिया। पहले भी वह मारता था और दोबारा भी मारपीट करने लगा। आखिरकार वे खुद वापस आश्रम लौट आईं। अब वे साफ कहती हैं कि उन्हें अपने घर नहीं जाना है।

पूरा परिवार करता था जुल्म

केसर का कहना है कि सिर्फ पोता ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार उन पर हाथ उठाता था। उनकी पांच पोतियां और दो पोते हैं। उनका बेटा कोई काम-धंधा नहीं करता और वह भी उन्हें गंदी-गंदी गालियां देता था। केसर का एक बेटा और एक बेटी है। बेटी की शादी हो चुकी है, लेकिन वह विधवा है और अपनी बेटी के साथ रहती है।

वे बताती हैं कि अपनी मेहनत की कमाई से उन्होंने दो पोतियों और एक पोते की शादी कराई, फिर भी किसी को उन पर जरा भी तरस नहीं आया। इस उम्र में भी उन्हें मारा-पीटा जाता रहा। केसर कहती हैं कि उन्होंने जिंदगीभर मेहनत की—करीब 20 साल तक एक डीएम के यहां खाना बनाया और उसके बाद सब्जी की ठेली लगाकर गुजारा किया। एक दिन तो वे मंडी में गिर भी गई थीं। एक-एक पैसा जोड़कर उन्होंने अपने बच्चों को बड़ा किया और उनकी शादियां कराईं, मगर आज वही लोग उन्हें घर से निकाल चुके हैं।

बहू मारती थी चप्पलों से

केसर बताती हैं कि घर में जब खाना बनता था तो सब मिल-बैठकर खा लेते थे, लेकिन उनसे खाने तक के लिए नहीं पूछा जाता था और कई बार वे भूखे पेट ही सो जाती थीं। पहले भी वे चार महीने आश्रम में रहीं, फिर पोता उन्हें ले गया था। अब दोबारा यहां आए तीन महीने हो चुके हैं। उनका पोता करीब 20 साल का है और उसकी मां यानी उनकी बहू भी उन्हें चप्पलों से पीटती थीं।

केसर भावुक होकर कहती हैं कि इस आश्रम में उन्हें अपने घर से कहीं ज्यादा सुख और शांति मिल रही है। अब वे यहीं रहना चाहती हैं और घर लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है। यहां उन्हें अच्छा खाना मिलता है और सब लोग उनका ख्याल रखते हैं। उन्होंने अपने पैसों से जो घर बनवाया था, उसी से उन्हें बेदखल कर दिया गया, जबकि एक-एक पैसा जोड़कर उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और बड़ा किया।

सेवादार ने बयां की हकीकत

आश्रम में बुजुर्गों की देखभाल करने वाली सेवादार किरण बजाज कहती हैं कि 85 साल की केसर अम्मा के साथ जो हुआ, वह बेहद दुखद है। पोता उन्हें मारता था और बहू चप्पलों से पीटती थी। किरण के मुताबिक, एक बार जब पोता अम्मा को साथ ले जाने आया था, तब उसने भरोसा दिलाया था कि अब वह अपनी दादी के साथ मारपीट नहीं करेगा। समझा-बुझाकर उसे भेजा गया, लेकिन कुछ ही दिनों में उसने फिर वही बर्ताव शुरू कर दिया।

किरण बजाज बताती हैं कि जब दोबारा मारपीट होने लगी तो केसर अम्मा वापस आश्रम लौट आईं और पिछले तीन महीने से यहीं रह रही हैं। उनका कहना है कि करीब 20 साल का लड़का अपनी 85 साल की दादी के साथ ऐसा सलूक करे, यह बेहद शर्मनाक है, और सबसे दुखद बात यह है कि उसकी मां भी इसमें उसका साथ देती थीं।

अब आश्रम ही बना नया घर

आज केसर अम्मा की आंखों में अपने ही परिवार से मिले जख्मों का दर्द साफ झलकता है। जिस मां ने पूरी उम्र परिवार के लिए संघर्ष किया, उसी को बुढ़ापे में अपमान, भूख और मार झेलनी पड़ी। अब वृद्धाश्रम ही उनका नया घर बन चुका है, जहां उन्हें सम्मान, भोजन और सबसे बढ़कर मन का सुकून मिल रहा है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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