उपनाम: फरीदाबाद वृद्धाश्रम
सब्जी बेचकर बच्चों का भविष्य संवारा, पर बेटे-बहू ने चप्पलों से पीटा, वृद्धाश्रम पहुंची मां की दास्तान
85 वर्ष की केसर अम्मा ने जिंदगीभर मेहनत कर बच्चों को पाला और शादियां कराईं, मगर बुढ़ापे में बेटे, बहू और पोते की मारपीट सहकर उन्हें फरीदाबाद के वृद्धाश्रम में पनाह लेनी पड़ी। आज यही आश्रम उनका नया घर बन गया है, जहां उन्हें सम्मान और सुकून मिल रहा है।
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एक महीने पहले
'याद नहीं, बिहार से मुझे यहां कौन छोड़ गया', फरीदाबाद पहुंचे इस बुजुर्ग की कहानी झकझोर देगी
फरीदाबाद के ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम में पहुंचे बिहार के आरा निवासी एक बुजुर्ग की कहानी सामने आई है, जिन्हें बीके अस्पताल में अकेला छोड़ दिया गया था। 65 से 70 साल के इस बुजुर्ग को आश्रम संचालक अपने साथ ले आए और अब उनकी देखभाल की जा रही है।
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एक महीने पहले