पाकिस्तान में लड़कियों का स्कूल बम से उड़ाया, खैबर पख्तूनख्वा में शिक्षा पर फिर बड़ा हमला विश्व 2 महीने पहले 83
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अज्ञात हमलावरों ने सरकारी गर्ल्स प्राइमरी स्कूल को विस्फोट कर पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस साल क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों पर हमलों की संख्या 11 तक पहुंच गई है।

घटना का विवरण

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लोअर साउथ वजीरिस्तान जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बिरमल तहसील के सारा घोवारा इलाके में स्थित एक सरकारी गर्ल्स प्राइमरी स्कूल को मंगलवार देर रात शक्तिशाली धमाकों से उड़ा दिया गया। हमलावरों ने बड़ी योजना के साथ स्कूल की पूरी इमारत में विस्फोटक सामग्री लगाई थी, जिसके चलते स्कूल पूरी तरह जमींदोज हो गया।

पुलिस की कार्रवाई

जिला पुलिस अधिकारी मोहम्मद ताहिर शाह ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच तेज कर दी गई है। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। स्थानीय स्तर पर इस हमले के बाद दहशत का माहौल है।

स्कूलों को निशाना बनाने का सिलसिला

इस क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों को निशाना बनाकर 11 हमले किए जा चुके हैं, जिनमें 13 लोगों की जान गई है। केवल बिरमल क्षेत्र में ही फरवरी और मार्च के दौरान दो अन्य स्कूलों पर हमले हुए थे। जानकारों का मानना है कि चरमपंथी समूह लड़कियों की शिक्षा का कट्टर विरोध करते हैं, जिसके चलते ये संस्थान उनके निशाने पर रहते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर संकट

पाकिस्तान में स्कूलों को निशाना बनाने का इतिहास काफी पुराना और खौफनाक रहा है। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो:

  • 2006 से अब तक पाकिस्तान में स्कूलों पर 557 से अधिक हमले दर्ज किए गए हैं।
  • इन हमलों में 321 लोगों की जान गई है और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
  • 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुआ हमला सबसे भयावह था, जिसमें 135 छात्रों समेत कुल 148 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। देश की कुल साक्षरता दर 63% है, जिसमें पुरुषों की दर 73% है जबकि महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 52-54% है। वर्तमान में लगभग 2.51 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जिनमें से 53% लड़कियां हैं। गरीबी, सुरक्षा की कमी और स्कूलों का अभाव लड़कियों की शिक्षा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधाएं हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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