दिल्ली में बिजली हुई महंगी: अब हर महीने बढ़ेगा रेट, जानिए DERC के नए आदेश की पूरी बात दिल्ली एक घंटा पहले 3
जून की प्रचंड गर्मी के बीच दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ गए हैं। DERC के आदेश के बाद अब बिजली वितरक कंपनियां हर महीने उपभोक्ताओं से PPAC चार्ज वसूलेंगी, जो पहले हर तिमाही पर लिया जाता था।

जून की भीषण गर्मी के बीच राजधानी दिल्ली के लोगों को बिजली के मोर्चे पर झटका लगा है। अब शहर में बिजली की दर हर महीने बढ़ेगी। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) के आदेश के बाद बिजली वितरक कंपनियां अब प्रति माह उपभोक्ताओं से PPAC चार्ज वसूल करेंगी, यानी हर महीने बिजली का बिल महंगा पड़ेगा। इससे पहले यह PPAC दर हर तिमाही के आधार पर बढ़ाई जाती थी और उपभोक्ताओं से उसी हिसाब से वसूली होती थी। दिल्ली में कुल तीन बिजली वितरक कंपनियां काम करती हैं और इन तीनों के इलाकों में PPAC का असर अलग-अलग पड़ेगा।

किसके बिल में कितनी बढ़ोतरी

टाटा पावर के क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ताओं को अब 1% अधिक भुगतान करना होगा। वहीं BSES के दायरे में आने वाले इलाकों के लोगों को अपने बिल पर 2.5% से 3.5% तक ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी।

क्या कहता है DERC का आदेश

दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने आज BRPL, BYPL और TPDDL को अप्रैल 2026 के पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC/FPPAS) की वसूली की मंजूरी दी है। यह दिल्ली में पहला मासिक PPAC आदेश है, क्योंकि पहले यह तिमाही आधार पर तय होता था। आयोग ने तीनों कंपनियों के लिए अलग-अलग दरें मंजूर की हैं:

  • BRPL: 17.94% (कंपनी की 31.55% की मांग में से काफी कम राशि की अनुमति दी गई)
  • BYPL: 17.43% (35.26% की मांग में कटौती की गई)
  • TPDDL: 16% (दस्तावेज जमा करने के बाद पूर्ण अनुमति)

आखिर PPAC है क्या

PPAC दरअसल बिजली खरीद की लागत यानी कोयले और ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का एक वैधानिक तरीका है। देश के 25 से ज्यादा राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसे पहले ही लागू कर चुके हैं। यह व्यवस्था माननीय APTEL के 2011 के आदेश, बिजली अधिनियम (Electricity Act) और बिजली मंत्रालय के 2021-2022 के निर्देशों के अनुसार अनिवार्य है।

DERC ने 10% की स्वत: सीमा से ऊपर की अतिरिक्त राशि की छूट इसलिए दी है ताकि वितरक कंपनियों (DISCOMs) को बिजली उत्पादकों को समय पर भुगतान करने में कठिनाई न हो। आयोग का मानना है कि PPAC के बिना DISCOMs पर तरलता का संकट खड़ा हो सकता है, जिसका बोझ अंततः ब्याज के रूप में उपभोक्ताओं पर ही पड़ता।

दिल्ली के लोगों पर क्या असर पड़ेगा

  • सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर असर नहीं: दिल्ली सरकार की सब्सिडी यूनिट्स की संख्या पर आधारित है, बिल की राशि पर नहीं। ऐसे में 200 से 500 यूनिट तक सब्सिडी पाने वाले आम परिवारों के बिल में PPAC के कारण कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी।
  • गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ता: ज्यादा बिजली खर्च करने वाले, व्यावसायिक और हाई-यूनिट घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में अप्रैल 2026 के लिए 7% से 18% तक अतिरिक्त सरचार्ज जुड़ सकता है।
  • नया कंपोनेंट 'F': इसके तहत आने वाले महीनों (जुलाई 2026 से) में पहले की किसी भी अंडर-रिकवरी को कैप के भीतर समायोजित करने का प्रावधान किया गया है। यह कदम स्थायी नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है।

यह फैसला क्यों जरूरी माना जा रहा है

  • अप्रैल 2026 में कोयले और ईंधन की कीमतों के साथ-साथ आयात लागत बढ़ने से बिजली खरीद की लागत में काफी इजाफा हुआ।
  • CERC केंद्र सरकार की कंपनियों (NTPC, NHPC आदि) को मासिक आधार पर पूरा पास-थ्रू देता है, और अब दिल्ली में भी मासिक PPAC की शुरुआत हो रही है।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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