एमबीबीएस का फुल फॉर्म क्या है और इसके नाम में M पहले क्यों आता है करियर एक महीने पहले 64
मेडिकल की डिग्री एमबीबीएस का मतलब बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी होता है। इसका नाम लैटिन भाषा के नियमों के आधार पर रखा गया है, जिसके पीछे एक दिलचस्प इतिहास है।

एमबीबीएस का पूरा अर्थ

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हर छात्र के लिए एमबीबीएस एक प्रतिष्ठित शब्द है। इसका फुल फॉर्म बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी है। चिकित्सा क्षेत्र की यह सबसे बुनियादी स्नातक डिग्री है, जिसे पूरा करने के बाद ही कोई छात्र मरीजों के उपचार के लिए अधिकृत होता है। देश में लाखों छात्र हर साल इस डिग्री को पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इसका नाम BMBS होने के बजाय MBBS क्यों है?

लैटिन भाषा और नामकरण का रहस्य

एमबीबीएस के नाम के पीछे का कारण लैटिन भाषा का व्याकरण है। लैटिन भाषा में इस डिग्री को मेडिसिनाए बैकालौरियस बैकालौरियस चिरुर्गिए कहा जाता है। लैटिन व्याकरण के नियमों का पालन करते हुए मेडिसिन का उल्लेख पहले किया जाता है, जिसके कारण M को प्राथमिकता दी गई। इसी कारण से इसे संक्षिप्त रूप में MBBS लिखा जाता है। यह कोई टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि भाषा के प्राचीन नियमों का परिणाम है।

मेडिसिन और सर्जरी का मेल

पुराने समय में यूरोप और ब्रिटेन में फिजिशियन और सर्जन दो अलग-अलग वर्ग माने जाते थे। इन दोनों की शिक्षा और प्रशिक्षण भी अलग-अलग दी जाती थी। हालांकि, 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश शासकों ने महसूस किया कि एक बेहतर डॉक्टर को इन दोनों विधाओं का ज्ञान होना अनिवार्य है। इसी सोच के साथ दोनों कोर्स को मिलाकर एक संयुक्त डिग्री तैयार की गई, जिसे हम आज एमबीबीएस के रूप में जानते हैं। यही प्रणाली भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान आई और अब भी जारी है।

कोर्स की अवधि और संरचना

एमबीबीएस का कुल कोर्स 5.5 साल का होता है, जिसे दो मुख्य भागों में बांटा गया है:

  • 4.5 साल की एकेडमिक पढ़ाई: इसमें कुल 9 सेमेस्टर होते हैं, जहां थ्योरी और प्रैक्टिकल के माध्यम से मानव शरीर, दवाओं और इलाज के तरीकों का गहन अध्ययन कराया जाता है।
  • 1 साल की इंटर्नशिप: पढ़ाई पूरी होने के बाद 1 साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। इसमें छात्र विभिन्न विभागों में सीनियर डॉक्टरों की निगरानी में मरीजों का इलाज सीखते हैं।

भारत में एमबीबीएस में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को NEET-UG परीक्षा पास करनी होती है। इसके बाद काउंसलिंग और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में सीटें आवंटित की जाती हैं। डिग्री पूरी होने के बाद छात्र प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं या आगे की पढ़ाई के लिए MD या MS जैसे कोर्स कर सकते हैं।

रितु चौधरी पाबना की शिक्षा एवं रोजगार रिपोर्टर हैं, जो रिजल्ट, भर्ती और सरकारी नौकरियों पर रिपोर्टिंग करती हैं। परीक्षा परिणाम, नोटिफिकेशन और भर्ती प्रक्रिया की ताजा जानकारी वे सटीकता से देती हैं। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए उनकी रिपोर्ट्स बेहद उपयोगी हैं।

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