जहानाबाद के सब्जी विक्रेता का बेटा बना डॉक्टर, NEET की परीक्षा में लहराया सफलता का परचम करियर एक घंटा पहले 2
जहानाबाद के जाफरगंज के रहने वाले मो. इश्तियाक ने आर्थिक तंगहाली और संघर्षों को मात देकर NEET 2026 परीक्षा उत्तीर्ण की है। सब्जी बेचकर परिवार की मदद करने वाले इश्तियाक अब MBBS की पढ़ाई कर समाज की सेवा करेंगे।

संघर्ष और सफलता की अनूठी दास्तान

बिहार के जहानाबाद जिले से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जाफरगंज मोहल्ले के निवासी मो. इश्तियाक ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जो कई लोगों के लिए केवल एक सपना होता है। इश्तियाक ने अपने तीसरे प्रयास में NEET 2026 की परीक्षा पास कर ली है और अब वे MBBS में दाखिला लेकर डॉक्टर बनने की राह पर हैं। खास बात यह है कि उनके माता-पिता किसानी और सब्जी बेचने का काम करते हैं, और इश्तियाक ने खुद भी अपने परिवार का हाथ बंटाने के लिए सिर पर सब्जी का बोझ ढोया है।

पढ़ाई के प्रति बचपन से ही लगन

मो. इश्तियाक की शैक्षिक यात्रा हमेशा से ही शानदार रही है। उन्होंने कक्षा तीसरी से लेकर आठवीं तक लगातार अपने स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। अपनी स्कूली शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने CBSE बोर्ड से दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने बिहार बोर्ड से बारहवीं कक्षा की परीक्षा दी, जिसमें उन्होंने लगभग 82 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनके भीतर बचपन से ही कुछ बड़ा करने की ललक थी, जिसके कारण वे लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।

खेती और सब्जी का कारोबार

इश्तियाक का परिवार आर्थिक रूप से बेहद सामान्य स्थिति में है। उनके पिता एक किसान हैं और उनकी माता भी खेती में ही अपना योगदान देती हैं। वे पट्टे पर खेत लेकर सब्जियां उगाते हैं। परिवार का पूरा भरण-पोषण इसी काम से होता है। सब्जी उगाने से लेकर उसे मार्केट तक पहुँचाने तक का काम परिवार के सदस्य खुद ही करते हैं। इश्तियाक ने भी कठिन समय में अपने माता-पिता का साथ दिया और जरूरत पड़ने पर सिर पर सब्जी की टोकरी रखकर बाजार तक पहुंचाई। इस गरीबी और मेहनत के बावजूद, उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी, हालांकि उन्हें यह भी ठीक से नहीं पता था कि उनका बेटा किस स्ट्रीम में पढ़ाई कर रहा है।

डॉक्टर बनने के पीछे की प्रेरणा

इश्तियाक ने अपनी सफलता का श्रेय पूरी तरह से अपने माता-पिता को दिया है। उन्होंने बताया कि उनके अभिभावकों ने कभी भी उन्हें पैसों की कमी का अहसास नहीं होने दिया। मेडिकल क्षेत्र में जाने के पीछे उनकी प्रेरणा उनके निजी अनुभवों से जुड़ी है। इश्तियाक के अनुसार, जब वे नौवीं कक्षा में थे, तब उनके दादा की तबीयत बहुत बिगड़ गई थी। उस दौरान उन्हें सही चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई और डॉक्टरों के व्यवहार ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। इसके अलावा, अपने भाई की लगातार बिगड़ती सेहत को देखकर उन्होंने यह ठान लिया कि वे एक डॉक्टर बनेंगे ताकि दूसरों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

इलाके में जश्न का माहौल

जहानाबाद का यह इलाका, जहां अक्सर NEET जैसी परीक्षाओं के बारे में लोगों को उतनी जानकारी नहीं होती, वहां इश्तियाक की इस उपलब्धि ने सभी को हैरान कर दिया है। इश्तियाक के डॉक्टर बनने के फैसले से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा इलाका गौरवान्वित महसूस कर रहा है। अपनी मेहनत से उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो विपरीत आर्थिक परिस्थितियां भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप