भारत
14 घंटे पहले
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को एक अहम कामयाबी हासिल करते हुए एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह हवा-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। DRDO के मुताबिक यह परीक्षण बेहद कठिन परिस्थितियों में किया गया, जिसमें सभी सब-सिस्टम की क्षमता परखने के लिए क्रिटिकल ट्रेजेक्ट्री तय की गई थी।
मिली जानकारी के अनुसार, लॉन्च होने के बाद मिसाइल अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य तक पूरी सटीकता के साथ पहुंची। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) द्वारा लगाए गए विभिन्न रेंज उपकरणों से मिले उड़ान डेटा से स्पष्ट हो गया कि इस परीक्षण के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे हुए।
मिसाइल को आकार देने में किसका रहा योगदान
रुद्रम-II मिसाइल को DRDO की नोडल प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद ने स्वदेशी तौर पर विकसित किया है। इसके विकास में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैबिलिशमेंट और ITR जैसी सहयोगी प्रयोगशालाओं का भी योगदान रहा। इसके साथ ही विकास सह उत्पादन साझेदारों (DCPP) के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रिजनल सेंटर फोर मिलिट्री एयरवर्दीनेस, मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी और कई अन्य उद्योगों ने भी इस लक्ष्य तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।
क्या है रुद्रम-II की खासियत
रुद्रम-II स्वदेशी रूप से विकसित ठोस प्रणोदक वाली वायु-प्रक्षेपित मिसाइल प्रणाली है, जो दुश्मन के कई तरह के ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है। DRDO की अलग-अलग प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार की गई कई अत्याधुनिक स्वदेशी टेक्नोलॉजी को इस मिसाइल सिस्टम में शामिल किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II मिसाइल के सफल परीक्षण पर DRDO और भारतीय वायुसेना को बधाई दी है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए DRDO, भारतीय वायुसेना, रक्षा उपक्रमों और उद्योग जगत के प्रयासों की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परीक्षण स्वदेशी रक्षा टेक्नोलॉजी की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है और उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह अहम योगदान है।
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