विटामिन डी की कमी को हल्के में न लें, डॉक्टर कुणाल सूद ने बताए शरीर में दिखने वाले 5 बड़े संकेत स्वास्थ्य एक घंटा पहले 6
हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी है। हाल ही में डॉक्टर कुणाल सूद ने शरीर में इसकी कमी के प्रमुख संकेतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है, जिन्हें नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है विटामिन डी

विटामिन डी हमारे स्वास्थ्य के लिए एक अनिवार्य पोषक तत्व है। यह न केवल हमारी हड्डियों को मजबूती देता है, बल्कि दांतों और मांसपेशियों के सही कामकाज में भी बड़ी भूमिका निभाता है। हालांकि, मौजूदा जीवनशैली और धूप में कम निकलने की वजह से लोगों में इस विटामिन की कमी आम होती जा रही है। 19 सितंबर को एनेस्थिसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर कुणाल सूद ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से विटामिन डी की कमी के पांच महत्वपूर्ण संकेतों के बारे में बताया है, जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

विटामिन डी की कमी के पांच प्रमुख लक्षण

  • हड्डियों में दर्द: हड्डियों के घनत्व और मजबूती को बनाए रखने के लिए यह विटामिन अहम है। इसकी कमी से हड्डियों का मिनरलाइज़ेशन प्रभावित होता है, जिससे ऑस्टियोमलेशिया जैसी स्थिति बन सकती है। यदि आपको पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों, पेल्विस या पैरों में तेज दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो रही है, तो यह विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है।
  • मांसपेशियों में कमजोरी: शरीर के प्रमुख हिस्सों, विशेष रूप से जांघों और कूल्हों के पास की मांसपेशियां इसकी कमी से कमजोर हो सकती हैं। आप अपनी दैनिक गतिविधियों के दौरान इसका अनुभव कर सकते हैं, जैसे कि सीढ़ियां चढ़ते समय कठिनाई महसूस होना या किसी कुर्सी से उठने में दिक्कत आना। हालांकि, केवल विटामिन डी का सेवन करने से ही मांसपेशियों की ताकत तुरंत वापस नहीं आ जाती, इसके लिए सही उपचार जरूरी है।
  • अत्यधिक थकान: डॉक्टर सूद के अनुसार, विटामिन डी के कम स्तर का संबंध अवसाद यानी डिप्रेशन के लक्षणों से भी देखा गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि केवल विटामिन की कमी ही डिप्रेशन का कारण है, लेकिन शोध बताते हैं कि यह डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों में एक सहायक भूमिका निभा सकता है।
  • छोटी चोटों पर फ्रैक्चर: यदि शरीर में लंबे समय तक विटामिन डी की गंभीर कमी बनी रहती है, तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वे सामान्य दबाव को भी नहीं झेल पातीं। इससे मामूली चोट या दबाव में भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, याद रखें कि फ्रैक्चर के अन्य कारण जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस या कुछ दवाओं का प्रभाव भी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजियोथेरेपी के जरिए बिना दवाओं के भी दर्द का प्रभावी इलाज संभव है और यह भविष्य में हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसे जोखिमों से बचाव में भी सहायक हो सकती है।
डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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