कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना का भीषण प्रहार, मिसाइल हमले में 4 नार्को-आतंकी ढेर विश्व एक घंटा पहले 5
कैरेबियन सागर में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली एक बोट को अमेरिकी सेना ने मिसाइल हमले में पूरी तरह नष्ट कर दिया, जिसमें सवार सभी चार तस्कर मारे गए।

कैरेबियाई जलक्षेत्र में सैन्य कार्रवाई

अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ा और घातक अभियान चलाया है। 19 सितंबर को अमेरिकी 'ज्वाइंट टास्क फोर्स वेस्टर्न हेमिस्फियर' ने एक सुनियोजित सैन्य ऑपरेशन के तहत समुद्र में तेजी से दौड़ रही एक हाई-स्पीड 'गो-फास्ट' बोट को अपना निशाना बनाया। इस सटीक मिसाइल हमले में बोट पूरी तरह जलकर मलबे में तब्दील हो गई और उस पर सवार सभी 4 नार्को-आतंकी मौके पर ही मारे गए। अमेरिकी साउदर्न कमांड के मुताबिक, यह कोई सामान्य तलाशी अभियान नहीं था, बल्कि एक 'काइनेटिक स्ट्राइक' थी जिसका उद्देश्य तस्करों को पूरी तरह खत्म करना था।

खुफिया जानकारी और हमले का वीडियो

अमेरिकी साउदर्न कमांड द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बात के पक्के सबूत थे कि यह बोट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी में सीधे तौर पर लिप्त थी। सेना ने इस भीषण हमले का एक वीडियो भी सार्वजनिक किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि पानी की लहरों पर दौड़ती बोट पलक झपकते ही आग के बड़े गोले में बदल जाती है। इस वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के बीच हड़कंप मचा दिया है।

ड्रग माफियाओं को कड़ा संदेश

यह हमला समंदर के रास्ते अमेरिका और अन्य देशों में नशीले पदार्थों का जहर घोलने वाले ड्रग कार्टेल्स के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी सेना ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं कि अब तस्करों को आत्मसमर्पण का मौका देने के बजाय सीधे मौत के घाट उतारा जाएगा। समुद्र के बीचों-बीच की गई इस कार्रवाई से साफ है कि अमेरिका अपनी सीमाओं के आसपास नशीले पदार्थों की गतिविधियों को लेकर अब पूरी तरह आक्रामक रुख अपना चुका है।

जारी है मौतों का सिलसिला

अमेरिकी सेना की ओर से यह जानकारी दी गई है कि यह हालिया हमला कैरिबियन में हुए एक अन्य सैन्य अभियान के करीब 10 दिन बाद किया गया है, जिसमें 3 लोगों की जान गई थी। जब से यह विशेष अभियान शुरू हुआ है, तब से कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सेना द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों में 220 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

विवाद और मानवाधिकार समूहों की चिंता

हालाँकि अमेरिकी सेना इसे अपनी सुरक्षा और ड्रग तस्करी रोकने के लिए आवश्यक मानती है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों ने इस तरह के ऑपरेशन्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई मानवाधिकार समूहों ने इन हमलों को 'बिना कानूनी प्रक्रिया के की गई हत्याएं' यानी 'एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग्स' करार दिया है। इन संगठनों का तर्क है कि बिना किसी कानूनी सुनवाई के सीधे मौत की सजा देना अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत है। फिलहाल, अमेरिकी मिलिट्री कमांड ने इन ऑपरेशन्स के जरिए नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने का अपना इरादा स्पष्ट रखा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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