राष्ट्रीय राजनीति
4 घंटे पहले
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार को पार्टी के बड़े नेताओं की उपस्थिति में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 64 वर्षीय शिवकुमार को लोक भवन के ग्लास हाउस में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेते समय शिवकुमार के हाथ में संविधान की प्रति थी और उन्होंने संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर शपथ ली। इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री के रूप में और 12 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।
मुख्यमंत्री बनते ही आठ बार के विधायक रहे शिवकुमार का वह सपना साकार हुआ, जिसके लिए उन्होंने लंबे अरसे तक राजनीतिक संघर्ष किया।
कैबिनेट में इन नेताओं को मिली जगह
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर के अतिरिक्त जिन 12 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें केएच मुनियप्पा, के जे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरेगौड़ा, प्रियंक खरगे, यू टी खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्धरमैया, बिरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल के नाम शामिल हैं।
इनमें खादर और यतींद्र को छोड़कर बाकी सभी नेता पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में पहले भी मंत्री रह चुके हैं। यू टी खादर अब तक कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के पद पर थे, वहीं यतींद्र पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के पुत्र हैं।
समारोह में पहुंचे ये वीआईपी मेहमान
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया मौजूद रहे। इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत कई अन्य नेता भी शामिल हुए। इस अवसर पर विभिन्न मठों के प्रमुखों सहित कई समुदायों के धार्मिक नेता भी उपस्थित थे।
शपथ लेने से पहले शिवकुमार ने खरगे, राहुल गांधी तथा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को गुलदस्ता भेंट कर और कांग्रेस का अंगवस्त्रम पहनाकर उनका स्वागत किया। राहुल गांधी ने शिवकुमार को गले लगाकर बधाई दी।
राज्यसभा-विधान परिषद चुनाव के बाद विस्तार संभव
शिवकुमार मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत फिलहाल कुल 14 सदस्य हैं। विधानसभा के संख्याबल के अनुसार राज्य में मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 सदस्य रखे जा सकते हैं। इस माह प्रस्तावित राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किए जाने की संभावना है।
इस्तीफे से साफ हुई थी राह
शिवकुमार और सिद्धरमैया के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान का अंत पिछले सप्ताह सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के साथ हुआ। आलाकमान के निर्देश के बाद सिद्धरमैया ने बीते 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस कदम से दक्षिण भारत में पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार के लिए यह पद संभालने का रास्ता साफ हो गया।
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