342 रुपये की बचत और चार साल का इंतजार खत्म, पठानकोट–जोगिंदरनगर रूट पर फिर दौड़ी ट्रेन; जानें टाइमिंग और शेड्यूल हिमाचल प्रदेश 5 घंटे पहले 3
करीब चार साल बाद हिमाचल प्रदेश की पठानकोट–जोगिंदरनगर रेल लाइन पर मंगलवार को रेल सेवा दोबारा शुरू हो गई, जिससे कांगड़ा और आसपास के हजारों लोगों को अहम परिवहन सुविधा फिर मिल गई है।

हिमाचल प्रदेश में करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को पठानकोट–जोगिंदरनगर रेलवे लाइन पर रेल सेवा एक बार फिर बहाल हो गई। इसके साथ ही कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को उनका जरूरी परिवहन संपर्क वापस मिल गया है। अधिकारियों के अनुसार, सेवा शुरू होते ही पूरे इलाके में उत्साह का माहौल देखने को मिला और यात्रियों ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया।

ट्रेन से सफर में बड़ी बचत

कई यात्रियों का कहना था कि ट्रेन से यात्रा करने पर उनके काफी पैसे बच जाते हैं। जोगिंदरनगर तक बस का किराया जहां करीब 392 रुपये है, वहीं ट्रेन से यह सफर महज 40 रुपये में पूरा हो जाता है। यानी यात्रियों को सीधे तौर पर 342 रुपये की बचत होती है। मंगलवार को इस रूट पर करीब 60 लोगों ने यात्रा की।

दो ट्रेनों से हुई शुरुआत

मंगलवार सुबह पठानकोट सिटी नैरो गेज रेलवे स्टेशन से सात-सात डिब्बों वाली दो ट्रेनें रवाना हुईं। ट्रेन नंबर 62465 सुबह पांच बजे चली, जबकि ट्रेन नंबर 52467 सुबह सात बजे रवाना हुई। हिमाचल प्रदेश की ओर से सेवा सुबह 8:30 बजे कांगड़ा रेलवे स्टेशन से आरंभ हुई।

क्यों बंद हुई थी रेल सेवा

पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बने चक्की रेलवे पुल का बड़ा हिस्सा अगस्त 2022 में आई बाढ़ के दौरान बह गया था, जिसके चलते इस रेल मार्ग पर अगस्त 2023 से ट्रेनों का संचालन ठप पड़ गया था। केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के प्रयासों से आधुनिक तकनीक की मदद से करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण किया गया, जिससे रेल सेवाओं को दोबारा शुरू करना संभव हो पाया।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रैक का पूरा निरीक्षण करने और सफल ट्रायल के बाद ही नियमित सेवा को फिर से चालू किया है।

अनुराग ठाकुर ने दिखाई हरी झंडी

हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि रेल सेवा बहाल होने में उम्मीद से अधिक समय लगा, लेकिन इस मुद्दे को लगातार केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के समक्ष रखा जाता रहा।

यह रेलवे लाइन पहाड़ी इलाकों के लोगों के लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि उनकी लाइफलाइन है।

ठाकुर ने बताया कि इस सेवा को जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए लगातार प्रयास किए गए।

164 किमी लंबा ऐतिहासिक सफर

उल्लेखनीय है कि पंजाब के पठानकोट से हिमाचल के जोगिंदरनगर तक यह ऐतिहासिक नैरो-गेज रेल लाइन 164 किमी लंबी है। धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं और हरी-भरी वादियों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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