दिल्ली नगर निगम की सख्ती जारी: आज 12 इमारतें ध्वस्त, 79 संपत्तियां सील दिल्ली एक घंटा पहले 5
निर्माण नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली नगर निगम ने आज राजधानी भर में 12 संपत्तियां गिराईं और 79 को सील किया। 1 जून से अब तक कुल 94 संपत्तियां ध्वस्त और 114 सील की जा चुकी हैं।

नई दिल्ली: राजधानी में बिल्डिंग बायलॉज यानी निर्माण नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ दिल्ली नगर निगम की मुहिम लगातार तेज होती जा रही है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर निगम पूरी दिल्ली में अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध सख्त कदम उठा रहा है।

शहरव्यापी इस बड़े अभियान के तहत 1 जून से लेकर आज तक निगम ने कुल 94 संपत्तियों को गिराने की कार्रवाई की है, जबकि 114 संपत्तियों को सील किया जा चुका है। अकेले आज ही पूरी दिल्ली में 12 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया और 79 संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई हुई। इनमें से अकेले दक्षिणी दिल्ली में 21 संपत्तियों पर तोड़-फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई की गई।

मालिकों को थमाए जा रहे नोटिस

निगम अपने सभी जोन में संपत्ति के गलत इस्तेमाल और निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर मालिकों को नोटिस भेज रहा है, जिनमें तोड़-फोड़ संबंधी नोटिस भी शामिल हैं। यह पूरा अभियान निगम की टीमें दिल्ली पुलिस के सहयोग से चला रही हैं।

निगम की टीमों ने बुलडोजर और अपने कर्मचारियों की मदद से अवैध ढांचों को जमींदोज किया तथा तय निर्माण नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों को सील कर दिया।

दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में चली कार्रवाई

निगम ने आज दक्षिण दिल्ली के अनेक इलाकों में तोड़-फोड़ और सीलिंग का अभियान न केवल जारी रखा बल्कि उसमें तेजी भी लाई। पुलिस बल के साथ निगम ने सैदुलाजाब, हौज रानी, खिड़की एक्सटेंशन, सावित्री नगर, खानपुर और गौतम नगर जैसे दक्षिणी क्षेत्र के इलाकों में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कुल 21 कार्रवाइयां कीं, जिनमें 3 तोड़-फोड़ और 18 सीलिंग शामिल रहीं।

इसके अलावा 1 जून से आज तक सैदुलाजाब, हौज रानी, खिड़की एक्सटेंशन, सावित्री नगर, सैनिक फार्म, खानपुर और गौतम नगर इलाकों में कुल 41 तोड़-फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई की जा चुकी है।

किन उल्लंघनों पर हो रही कार्रवाई

जिन संपत्तियों पर शिकंजा कसा जा रहा है, वे निर्माण नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कर रही हैं। इनमें नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करते हुए गलत इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं, जैसे बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) गेस्ट हाउस चलाना और बेसमेंट में गैर-कानूनी ढंग से लाइब्रेरी संचालित करना।

अभियान के दौरान उन बिल्डरों और मालिकों पर खास नजर रखी जा रही है जो नियम तोड़ रहे हैं, ताकि उन्हें मास्टर प्लान-2021, यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज़-2016 और डीएमसी एक्ट-1957 में दर्ज निर्माण व संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की अहमियत समझाई जा सके।

उल्लंघन करने वालों को कड़ा संदेश

इन कार्रवाइयों का मकसद बेईमान बिल्डरों और मालिकों को साफ संदेश देना है कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत निर्माण, अवैध उपयोग या सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर उन्हें तोड़-फोड़ या सीलिंग जैसे गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इससे आगे होने वाले उल्लंघनों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।

कार्रवाई के दौरान संबंधित मालिकों और कब्जाधारियों को सही जानकारी भी दी जा रही है। निगम का कहना है कि आम लोगों के लिए यही समझदारी होगी कि वे अपनी संपत्ति पर निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले उपरोक्त कानूनों का अनिवार्य रूप से पालन करें, ताकि तोड़-फोड़ या सीलिंग जैसी कार्रवाई से बचा जा सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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