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एक घंटा पहले
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न्यू मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने इतिहास का एक यादगार पल अपनी आंखों के सामने बनते देखा। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच के पहले ही दिन भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने ऐसी पारी खेली, जो लंबे समय तक क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में बसी रहेगी। उन्होंने 138 गेंदों पर 11 चौके और 1 गगनचुंबी छक्के की बदौलत अपने टेस्ट करियर का 11वां शतक पूरा किया।
जिस गेंद पर पूरा हुआ ऐतिहासिक शतक
मैच के 83वें ओवर की पांचवीं गेंद पर अफगानिस्तान के गेंदबाज सलीम साफी ने बैक ऑफ द लेंथ डिलीवरी फेंकी, जो एंगल लेते हुए कूल्हों की ओर आ रही थी। क्रीज पर खड़े गिल ने बेहद नजाकत के साथ उसे बैकवर्ड ऑफ स्क्वायर की ओर खेला। गेंद बल्ले को छूकर फील्डर से दूर निकली और गिल ने तेजी से एक रन पूरा कर अपना शतक मुकम्मल कर लिया। इसके साथ ही पूरा स्टेडियम 'गिल-गिल' के नारों से गूंज उठा।
शतक पूरा होते ही गिल ने अपना हेलमेट उतारा और अपने चिर-परिचित अंदाज में झुककर दर्शकों का अभिवादन किया, फिर बल्ले को आसमान की ओर उठाया। ड्रेसिंग रूम में बैठे उनके साथी खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ खड़े होकर तालियां बजाते रहे, वहीं नॉन-स्ट्राइकर छोर पर मौजूद ऋषभ पंत ने दौड़कर अपने कप्तान को गले लगा लिया।
तीनों प्रारूपों में जमाई धाक
यह पारी इसलिए भी बेहद खास रही, क्योंकि सिर्फ 26 साल की उम्र में गिल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 20 शतक पूरे कर लिए। इस उम्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए सपने जैसा होता है।
गिल के 20 इंटरनेशनल शतकों पर नजर डालें तो उन्होंने खेल के तीनों प्रारूपों में अपनी छाप छोड़ी है। टेस्ट क्रिकेट में अब उनके नाम 11 शतक दर्ज हो चुके हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 8 बार शतकीय पारियां खेली हैं। टी20 इंटरनेशनल में भी उनके बल्ले से 1 शानदार शतक निकल चुका है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि गिल किसी एक फॉर्मेट के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि हर परिस्थिति और हर प्रारूप में खुद को ढालने का हुनर रखते हैं।
कप्तानी में दिग्गजों के क्लब की ओर
बतौर कप्तान भी शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों की सूची में तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं। भारत के लिए टेस्ट में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में विराट कोहली शीर्ष पर हैं, जिन्होंने 113 पारियों में 20 शतक जड़े हैं। इसके बाद सुनील गावस्कर का नाम आता है, जिन्होंने 74 पारियों में 11 शतक बनाए हैं।
इसी सूची में मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 78 पारियों में 9 शतक और सचिन तेंदुलकर ने महज 43 पारियों में 7 कप्तानी शतक लगाए हैं। लेकिन जिस रफ्तार से गिल इस फेहरिस्त में अपनी जगह बना रहे हैं, वह हैरान करने वाली है। उन्होंने बतौर कप्तान सिर्फ 15 पारियों में अपना छठा टेस्ट शतक ठोक दिया है। यह रफ्तार बताती है कि कप्तानी का दबाव उनके खेल को प्रभावित करने के बजाय और निखार रहा है।
घरेलू मैदान पर कंधों पर ली जिम्मेदारी
अपने घरेलू मैदान पर इस तरह की ऐतिहासिक पारी खेलना हर क्रिकेटर की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है, और यहां की मिट्टी के मिजाज को गिल बखूबी समझते हैं। जब टीम को एक कप्तानी पारी की दरकार थी, तब उन्होंने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। 138 गेंदों की इस पारी में उन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट खेले।
स्पिनरों के खिलाफ जहां उन्होंने कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल किया, वहीं तेज गेंदबाजों के सामने उनकी टाइमिंग देखने लायक रही। उनके 11 चौके तकनीकी मजबूती की गवाही दे रहे थे, तो इकलौता छक्का उनकी ताकत और आत्मविश्वास का सबूत बना।
भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बने गिल
सलीम साफी की गेंद पर सिंगल लेते ही गिल ने न सिर्फ अपना शतक पूरा किया, बल्कि यह भरोसा भी जगाया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। ऋषभ पंत का उन्हें बधाई देना और पूरे स्टेडियम का खड़े होकर सम्मान करना इस बात का प्रमाण है कि शुभमन गिल अब भारतीय बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ बन चुके हैं।
26 साल की उम्र में 20 इंटरनेशनल शतक और कप्तानी में ऐसा बेमिसाल रिकॉर्ड, यह तो महज शुरुआत है। मुल्लांपुर में लिखा गया यह अध्याय आने वाले समय में गिल के करियर के सुनहरे पन्नों में सबसे ऊपर गिना जाएगा। प्रशंसकों को उम्मीद रहेगी कि उनका बल्ला यूं ही रनों की बारिश करता रहे और वे देश को हर मैदान पर जीत दिलाते रहें।
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