मक्के की खेती से किसानों की होगी मोटी कमाई, जून-जुलाई में बुवाई के साथ पाएं 50% सब्सिडी उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 45
जून और जुलाई का समय मक्के की खेती के लिए सबसे उत्तम है, जहां वैज्ञानिक विधि अपनाने से किसान बंपर उत्पादन के साथ सरकारी सब्सिडी का लाभ भी उठा सकते हैं।

मक्के की खेती का सही समय और लाभ

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में मक्के की खेती के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पहली अच्छी बारिश के बाद की गई बुवाई किसानों को बंपर मुनाफा दे सकती है। इस खेती के माध्यम से न केवल किसानों की आय में इजाफा होगा, बल्कि सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी का लाभ भी उन्हें मिलेगा।

बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका

मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार, मक्के की फसल के लिए अलग-अलग किस्मों के हिसाब से बीज की मात्रा निर्धारित की गई है:

  • सामान्य मक्के के लिए 8 से 10 किलो बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है।
  • बेबी कॉर्न की बुवाई के लिए 16 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर चाहिए।
  • स्वीट कॉर्न के लिए 6 से 8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है।

खेती को वैज्ञानिक तरीके से करने के लिए हाइब्रिड मक्का बोते समय लाइन से लाइन की दूरी 60 से 70 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर का अंतर रखना बेहद जरूरी है।

उपज और सरकारी सब्सिडी

बीज की बुवाई करते समय उसे 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई में लगाना चाहिए। यदि किसान नाली बनाकर बुवाई करते हैं, तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। इस वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक उपज मिल सकती है, जिससे किसानों को 30 से 50 हजार रुपये तक का फायदा हो सकता है। सरकार की ओर से विभिन्न किस्मों पर लागत का 50% तक सब्सिडी के रूप में दिया जाता है, जिससे खेती की लागत कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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