कॉकरोच जनता पार्टी ने बीसीआई चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की, जानिए पूरा मामला राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 2
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। यह मांग नालसर यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध पर बीसीआई द्वारा की गई कार्रवाई के बाद उठी है।

बीसीसीआई के चेयरमैन पर बढ़ा दबाव

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाली इस पार्टी ने अब अपना रुख बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी बीसीआई की ओर मोड़ लिया है। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक बयान में मांग की है कि बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

विवाद की जड़ में है नालसर यूनिवर्सिटी का मामला

यह पूरा विवाद हैदराबाद स्थित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। दरअसल, विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था। छात्रों की नाराजगी मुख्य न्यायाधीश द्वारा जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर थी।

बीसीआई का विवादास्पद आदेश

इस विरोध के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए एक सख्त आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि वर्ष 2026 में नालसर यूनिवर्सिटी से पास होने वाले किसी भी छात्र का वकील के तौर पर पंजीकरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, बीसीआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उन सभी छात्रों की सूची भी तलब की थी, जिन्होंने इस पूरे विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की थी। बीसीआई के इस आदेश के बाद सैकड़ों छात्रों का करियर खतरे में पड़ता नजर आया, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की आपत्ति के बाद बीसीआई ने अपना यह आदेश वापस ले लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

शुक्रवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बीसीआई की कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीसीआई को विश्वविद्यालय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे किसी भी हाल में कुचला नहीं जाएगा।

कोर्ट का बीसीआई को निर्देश

मुख्य न्यायाधीश ने बीसीआई और देश की सभी स्टेट बार काउंसिल्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों या वहां के शिक्षकों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई न करें। शीर्ष अदालत ने बीसीआई को आगामी दो हफ्तों के भीतर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर ने तर्क दिया कि बीसीआई की दखलंदाजी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।

सौरव दास का रुख

इस पूरी घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने बीसीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बीसीआई ने बिना अधिकार के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की, वह एक संवैधानिक संस्था के लिए उचित नहीं है। पार्टी का मानना है कि इस प्रकरण की जिम्मेदारी लेते हुए मनन कुमार मिश्रा को अपने पद से हट जाना चाहिए। अब यह मामला पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और सभी की नजरें बीसीआई द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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