उत्तर प्रदेश
5 दिन पहले
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विचारों
दिव्यांग बच्चों को अक्सर सीमित अवसरों के दायरे में देखा जाता रहा है, लेकिन चित्रकूट में उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को नई पहचान दिलाने के लिए एक खास पहल की जा रही है। इसके तहत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकूट में चिल्ड्रन थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।
इस कार्यशाला में चित्रकूट के दिव्यांग बच्चों के साथ-साथ सामान्य बच्चों को भी जोड़ा गया है। यहां उन्हें अभिनय, संगीत, चित्रकला, वॉइस और स्पीच जैसी विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
चित्रकूट पहुंची एनएसडी की टीम
इस विशेष कार्यशाला के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली की टीम चित्रकूट पहुंची है। टीम बच्चों को केवल रंगमंच की बारीकियां ही नहीं सिखा रही, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
बच्चों को सही ढंग से बोलना, मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना तथा बैठने और संवाद करने का तरीका भी सिखाया जा रहा है, ताकि वे समाज में खुद को मजबूती के साथ प्रस्तुत कर सकें और अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
'शबरी के राम' पर आधारित नाट्य प्रस्तुति
कार्यशाला के दौरान बच्चे 'शबरी के राम' विषय पर आधारित एक नाट्य प्रस्तुति तैयार कर रहे हैं। इस नाटक में अन्य बालिकाओं के साथ-साथ दिव्यांग बालिकाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा वे अपनी संगीत प्रतिभा का भी प्रदर्शन करेंगी।
दिव्यांग बच्चियों का भी हुआ चयन
दिल्ली से आईं मुस्कान गोस्वामी ने बताया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा देश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की समर वर्कशॉप आयोजित करता है। चित्रकूट में भी सामान्य और दिव्यांग बच्चों का चयन कर उन्हें एक साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जब टीम ने यहां काम शुरू किया था, तब कई बच्चों में आत्मविश्वास की कमी थी और वे खुलकर बात तक नहीं कर पाते थे। लेकिन पिछले एक महीने की नियमित ट्रेनिंग के बाद उनके व्यवहार और प्रदर्शन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
21 जून को दिल्ली में होगी प्रस्तुति
मुस्कान गोस्वामी ने आगे बताया कि 17 जून को ग्रामोदय विश्वविद्यालय में 'शबरी के राम' नाटक का रिहर्सल आयोजित होगा, जिसमें सभी चयनित दिव्यांग बच्चे भाग लेंगे। इसके बाद 21 और 22 जून को नई दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में इस नाटक तथा बच्चों की संगीत प्रस्तुतियों का मंचन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में चित्रकूट से कुल 39 बच्चे हिस्सा लेने जाएंगे, जबकि देश के अन्य 7 स्थानों से भी कई बच्चे अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस पहल से दिव्यांग बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी और उनका आत्मबल भी बढ़ेगा।
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