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एक घंटा पहले
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया की यात्रा पर जा रहे हैं। दोनों देशों ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी। शी जिनपिंग 8-9 जून को उत्तर कोरिया पहुंचेंगे और सोमवार व मंगलवार को राजधानी प्योंगयांग में रहेंगे। 2019 के बाद यह उनकी पहली उत्तर कोरिया यात्रा होगी, जिसे पूर्वोत्तर एशिया की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन रूस के साथ अपने रिश्ते तेजी से मजबूत कर रहे हैं। यूक्रेन युद्ध में मॉस्को को सैनिक और हथियार भेजे जाने के बाद रूस और प्योंगयांग की नजदीकियां काफी बढ़ गई हैं। इसी बीच उत्तर कोरिया ने हाल ही में अपनी नई परमाणु ताकत का प्रदर्शन भी किया है।
आखिर चीन को क्यों आई किम की याद?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती दोस्ती के माहौल में चीन अपना दबदबा कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक विलियम यांग के मुताबिक, चीन इस यात्रा के जरिए प्योंगयांग पर अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करना चाहता है और इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करना उसका मकसद है।
दौरे से पहले किम का बड़ा परमाणु दांव
शी जिनपिंग की यात्रा की घोषणा से ठीक एक दिन पहले उत्तर कोरिया ने एक नए परमाणु संयंत्र का खुलासा किया। दक्षिण कोरिया की सेना का मानना है कि यह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) केंद्र है, जहां परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी सामग्री तैयार की जा सकती है। इस संयंत्र का दौरा करते हुए किम जोंग उन ने ऐलान किया कि उनका देश अपनी परमाणु शक्ति को और तेज रफ्तार से बढ़ाएगा।
क्या बढ़ेगी अमेरिका और ट्रंप की चिंता?
उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है। संयुक्त राष्ट्र इस देश पर पहले ही कई आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही कई मौकों पर किम जोंग उन के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई हो, लेकिन उत्तर कोरिया साफ कर चुका है कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त पर किसी बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
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