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13 घंटे पहले
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विचारों
साउथ चाइना सी में लंबे समय से अपनी ताकत का प्रदर्शन और जासूसी करता आ रहा चीन अब दो मोर्चों पर घिरता दिख रहा है। समंदर के जिस हिस्से को चीन अपनी निजी संपत्ति मानता रहा है, वहां अब इंसानी सैनिकों की जगह लोहे और बारूद से लैस रोबोटिक 'कुत्ते' गश्त लगाते नजर आएंगे और जरूरत पड़ने पर हमला भी करेंगे। एक तरफ ताइवान की यह नई तकनीकी चाल है, तो दूसरी तरफ भारत की रणनीतिक घेरेबंदी से भी बीजिंग असहज है।
ताइवान की 'रोबोटिक डॉग' रणनीति आखिर है क्या?
ताइवान की सेना के सबसे बड़े हथियार निर्माण संस्थान 'नेशनल चुंग-शान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी' ने मीडिया के सामने तीन रोबोटिक पैट्रोल डॉग्स का लाइव डेमो पेश किया है। ये रोबोट आने वाले दिनों में चीन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सीधे गोलियां भी बरसा सकेंगे। ताइवान की इस तैयारी ने चीन को हैरत में डाल दिया है।
साउथ चाइना सी में ताइवान के पास कुछ बेहद अहम रणनीतिक द्वीप हैं, जैसे प्रतास और स्प्रैटली द्वीप समूह का इतू अबा द्वीप। इन द्वीपों पर कोई आम आबादी नहीं रहती, सिर्फ कोस्ट गार्ड के जवान तैनात रहते हैं। बीते कुछ समय से चीन अपने कोस्ट गार्ड और खतरनाक जासूसी ड्रोन्स के जरिए इन द्वीपों के आसपास दबदबा दिखाने की कोशिश करता रहा है, जिसकी शिकायत ताइवान लगातार करता आया है।
चीन के सामने उतारे गए तीन रोबोट डॉग्स
चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए ताइवान ने अमेरिकी मिलिट्री सप्लायर कंपनी 'घोस्ट रोबोटिक्स' से ये चार पैरों वाले रोबोट खरीदे हैं। ताइवान के वैज्ञानिकों ने इन रोबोटिक कुत्तों की पीठ पर अपनी जासूसी और सर्विलांस तकनीक लगाई है। इनके तीन अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए हैं।
- पहला वर्जन: यह जासूसी रोबोट डॉग है, जो चुपचाप दुश्मन के इलाके में घुसकर पूरी जानकारी जुटाएगा और उसे डेटा सेंटर तक भेजेगा।
- दूसरा वर्जन: यह चौबीसों घंटे समंदर के किनारे और रेतीले तटों पर कड़ी निगरानी रखेगा और कोई गड़बड़ी होने पर तुरंत रिपोर्ट करेगा।
- तीसरा वर्जन: यह सबसे खतरनाक है। इस रोबोट कुत्ते की पीठ पर एक ऑटोमैटिक गन लगाई गई है, जो रिमोट कंट्रोल से पलक झपकते ही दुश्मन को ढेर कर सकती है।
भारत की चाल से क्यों चिढ़ा है चीन?
एक ओर ताइवान रोबोटिक सेना तैयार कर रहा है, तो दूसरी ओर साउथ चाइना सी में भारत की मौजूदगी ने भी चीन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चीन हमेशा भारत को सिर्फ हिंद महासागर तक सीमित देखना चाहता था, लेकिन भारत ने अब सीधे चीन के गढ़ यानी साउथ चाइना सी में अपनी रणनीतिक घेरेबंदी मजबूत कर ली है, जिससे जिनपिंग सरकार बेहद नाराज है।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट
भारत अब केवल अपनी समुद्री सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत भारतीय नौसेना के घातक युद्धपोत, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और पनडुब्बियां अक्सर साउथ चाइना सी में गश्त कर रही हैं। भारत की इस 'फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट' नीति से चीन की एकतरफा दादागीरी को सीधी चुनौती मिल रही है।
वियतनाम और फिलीपींस से बढ़ती नजदीकी
चीन के पड़ोसी देशों वियतनाम और फिलीपींस के साथ भारत ने अपनी रक्षा साझेदारी को अगले स्तर तक पहुंचा दिया है। भारत ने फिलीपींस को अपनी सबसे घातक सुपरसोनिक 'ब्रह्मोस मिसाइल' की आपूर्ति की है। फिलीपींस इन मिसाइलों को साउथ चाइना सी के तटों पर तैनात कर रहा है, ताकि चीनी नौसेना के जहाजों को सीधे निशाने पर लिया जा सके।
क्वाड की घेराबंदी
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक संगठन 'क्वाड' के जरिए भारत लगातार साउथ चाइना सी में 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' की वकालत कर रहा है। भारत यहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही का पुरजोर समर्थन करता है, जिसे चीन अपने लिए बड़ा खतरा मानता है।
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