मिर्च की फसल में भंगुरी रोग से न घबराएं, अपनाएं ये 3 असरदार उपाय बिहार एक महीने पहले 19
मिर्च की खेती में लगने वाले भंगुरी (येलो वेन मोजैक वायरस) रोग से बचाव के लिए पौधा संरक्षण अधिकारी ने तीन कारगर तरीके बताए हैं। जानिए कैसे करें इस रोग पर नियंत्रण।

बिहार में बड़ी आबादी की आजीविका आज भी खेती-किसानी पर टिकी हुई है। अब किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर नई तरह की खेती की ओर रुख कर रहे हैं और इसी क्रम में फल व सब्जी की खेती पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि इस खेती में थोड़ा जोखिम भी रहता है, क्योंकि इसमें कीट प्रबंधन समेत कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं, जिन्हें सुलझाने में किसान अक्सर परेशान हो जाते हैं। लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पौधा संरक्षण अधिकारी सुजीत पाल ने इससे निपटने के उपाय बताए हैं।

क्यों खतरनाक है यह रोग

मौजूदा समय में सब्जी की खेती में अच्छा मुनाफा है, इसलिए किसान मिर्च की फसल लगा रहे हैं। लेकिन इसमें एक बीमारी देखने को मिलती है, जिसमें पत्ते मुरझाए हुए नजर आने लगते हैं और धीरे-धीरे पीले पड़ जाते हैं। इसका सीधा असर फसल के फलन पर पड़ता है और उत्पादन घट जाता है। आम बोलचाल में इसे ही भंगुरी लगना कहा जाता है।

वैज्ञानिक पहचान

पौधा संरक्षण अधिकारी सुजीत पाल बताते हैं कि इस रोग का वैज्ञानिक नाम येलो वेन मोजैक वायरस है, जो मिर्च की फसल के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी की चपेट में आने पर मिर्च का फलन टेढ़ा होने लगता है। यह एक वायरल बीमारी है, इसलिए इससे पूरी तरह निजात पाना थोड़ा मुश्किल होता है। आमतौर पर यह रोग बारिश के दिनों में लगता है और पौधे के लिए नुकसानदेह साबित होता है।

बचाव के तीन उपाय

सुजीत पाल के अनुसार इस रोग से बचाव के लिए कुछ कारगर तरीके अपनाए जा सकते हैं।

  • नीम तेल का छिड़काव: अगर आप जैविक खेती करते हैं तो फसल पर नीम तेल का छिड़काव करें, क्योंकि यह रोग सफेद कीट से फैलता है।
  • पीला और नीला ट्रैप: रोकथाम के लिए खेत में पीला ट्रैप और नीला ट्रैप लगाएं। इनमें चिपचिपा पदार्थ होता है, जिससे कीट उसमें चिपक जाते हैं।
  • कीटनाशी के साथ सकिंग पेस्ट: तीसरे उपाय के तौर पर एक कीटनाशी के साथ एक सकिंग पेस्ट मिलाकर छिड़काव करें, जिससे रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

कीटनाशक के बाद बरतें यह सावधानी

अधिकारी ने बताया कि अगर आप कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि कम से कम एक सप्ताह तक मिर्च न तोड़ें। इसका असर पूरे सप्ताह भर बना रहता है, इसलिए छिड़काव के एक सप्ताह बाद ही मिर्च तोड़नी चाहिए। इस रोग में पौधे की पत्तियां पूरी तरह मुरझाई हुई लगती हैं, पत्ते झड़ने भी लगते हैं और फलन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि इससे बचाव के उपाय तुरंत किए जाएं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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