हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में पहली कक्षा से ही पढ़ाई जाएगी नैतिक शिक्षा, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिए निर्देश हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 5
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से नैतिक शिक्षा अनिवार्य करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही राज्य के 100 नए सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाएगी।

स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के सरकारी शिक्षण संस्थानों में पहली कक्षा के छात्र नैतिक शिक्षा का अध्ययन करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनका मानना है कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री हासिल करना या किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि इसके जरिए बच्चों में सही मूल्यों का बीजारोपण करना भी अनिवार्य है।

नैतिकता और चरित्र निर्माण पर जोर

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि आने वाली पीढ़ी के भीतर अनुशासन, बड़ों के प्रति सम्मान, करुणा और व्यक्तिगत जिम्मेदारी जैसे मानवीय गुणों का विकास किया जाना चाहिए। बुधवार को शिमला में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों में अच्छे चरित्र का निर्माण करना वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता है। बैठक में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने और शैक्षणिक वातावरण को और अधिक बेहतर बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सीबीएसई यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया पर भी इस बैठक में मंथन हुआ। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जिन स्कूलों में यह पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, वहां संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि 100 नए सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए ताकि पढ़ाई में किसी भी तरह का व्यवधान न आए। साथ ही, जूनियर बेसिक टीचर यानी जेबीटी के 600 रिक्त पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी लाने के आदेश दिए गए हैं ताकि स्कूलों को पर्याप्त स्टाफ मिल सके।

हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा

बैठक के दौरान राज्य सरकार की नई भर्ती योजनाओं की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार कुल 3,900 शिक्षकों और 900 गैर-शिक्षक कर्मचारियों के पदों को भरने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इन नियुक्तियों के माध्यम से स्कूलों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सीबीएसई स्कूलों में मिनिस्ट्रीयल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी आकलन करने के निर्देश दिए हैं ताकि सरकारी स्कूलों का संचालन पूरी तरह सुचारू हो सके।

शिक्षा विभाग की प्राथमिकताएं

बैठक में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी शिक्षण संस्थानों को एक मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षा की गुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही तय करने पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा सचिव डॉ. यूनुस और स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के इन निर्देशों को धरातल पर उतारने का आश्वासन दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप