हरियाणा
एक घंटा पहले
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हरियाणा में बिजली संकट की आहट
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर लामबंद हो गए हैं। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया जा रहा है। विरोध स्वरूप कर्मचारियों ने 22 अक्टूबर से तीन दिन के लिए प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। हिसार के राजगढ़ रोडवेज विद्युत नगर सदन में कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन भी दर्ज कराया है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सरकार ने तत्परता दिखाई है और बुधवार दोपहर एक आधिकारिक पत्र जारी कर बिजली निगम के 25 अधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। इन सभी अधिकारियों को अपने कार्यस्थल पर तुरंत रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
मंत्री अनिल विज से बातचीत से इनकार
मामले को सुलझाने के उद्देश्य से हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बुधवार दोपहर 3 बजे बिजली कर्मियों और इंजीनियरों के संयुक्त मंच हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा को बैठक के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, मोर्चा ने मंत्री के इस निमंत्रण को स्वीकार करने से मना कर दिया है। मोर्चे ने इस संबंध में HVPNL के चीफ इंजीनियर को एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि वे इस बैठक में शामिल होने में असमर्थ हैं। मोर्चा के पदाधिकारियों का तर्क है कि प्रशासन ने बैठक के लिए बहुत कम समय दिया है। साथ ही, संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं और अन्य सदस्य पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जिसके चलते वार्ता में शामिल होना संभव नहीं हो सका।
क्यों हो रही है हड़ताल
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को देने का निर्णय लिया है। इसी निर्णय के विरोध में सोमवार शाम करनाल में हुई आपातकालीन बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया गया। संयुक्त मोर्चे के प्रवक्ता बलजीत बेनीवाल ने इसे राज्य के बिजली क्षेत्र का अप्रत्यक्ष निजीकरण करार दिया है। मोर्चे ने घोषणा की है कि 21 अक्टूबर को पूरे राज्य में HERC के इस आदेश की प्रतियां जलाई जाएंगी और इसे ब्लैक ऑर्डर के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल 22 से 24 अक्टूबर तक जारी रहेगी और अंतिम दिन आंदोलन की अगली रणनीति का खुलासा किया जाएगा। बलजीत बेनीवाल के अनुसार, गुरुग्राम और नूंह जैसे ज्यादा राजस्व देने वाले क्षेत्रों को निजी कंपनी को सौंपना दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को आर्थिक रूप से कमजोर करने की सोची समझी साजिश है। इससे पहले राज्य में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं, और अब बिजली कर्मचारियों का यह रुख सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।
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