EV या पेट्रोल कार: कौन ज्यादा महंगी? 50,000 KM पर खर्च का पूरा गणित यहां समझिए ऑटो 13 घंटे पहले 1
इलेक्ट्रिक और पेट्रोल कार को 50,000 किलोमीटर चलाने के बाद ईंधन, चार्जिंग और मेंटेनेंस का खर्च जोड़ने पर साफ हो जाता है कि लंबे समय में किसकी जेब पर कम बोझ पड़ता है। यह सीधा हिसाब आपकी अगली कार का फैसला बदल सकता है।

बढ़ती ईंधन कीमतों और प्रदूषण की चिंता के बीच आज हर कार खरीदार के सामने एक ही उलझन है — इलेक्ट्रिक कार (EV) लें या पेट्रोल कार? पहली नजर में ईवी अपनी ऊंची कीमत की वजह से महंगी जान पड़ती है, जबकि पेट्रोल कार बजट में आसानी से फिट हो जाती है। लेकिन असली फर्क तब दिखता है जब गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगती है। केवल 50,000 किलोमीटर चलने के बाद दोनों के खर्च के बीच जमीन-आसमान का अंतर खड़ा हो जाता है। शुरू में महंगी दिखने वाली ईवी लंबी दूरी तय करने पर लाखों रुपये बचा सकती है। आइए, बिना किसी पेच के मेंटेनेंस, रनिंग कॉस्ट और रीसेल वैल्यू के सीधे-सादे गणित से समझते हैं कि आपके लिए कौन-सी कार असली पैसा वसूल साबित होगी।

शुरुआती कीमत का गणित

पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार की शुरुआती कीमत में बड़ा फासला होता है। आमतौर पर एक ही सेगमेंट और मॉडल की पेट्रोल कार की तुलना में उसका ईवी (EV) वेरिएंट करीब 3 से 5 लाख रुपये महंगा पड़ता है।

  • पेट्रोल कार: कम शुरुआती कीमत, कम डाउन पेमेंट और कम लोन ईएमआई (EMI)।
  • इलेक्ट्रिक कार: ऊंची शुरुआती कीमत, मगर टैक्स में छूट तथा कई राज्यों में रोड टैक्स व रजिस्ट्रेशन फीस पर मिलने वाली सब्सिडी से यह अंतर थोड़ा घट जाता है।

रनिंग कॉस्ट: प्रति किलोमीटर का सीधा हिसाब

कार चलाने का असली खर्च यहीं तय होता है। एक ओर पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं, तो दूसरी ओर बिजली की दरें काफी सस्ती बनी हुई हैं।

  • पेट्रोल कार: यदि कार 15 किमी/लीटर का माइलेज देती है और पेट्रोल ₹100/लीटर है, तो प्रति किलोमीटर खर्च करीब ₹6.66 बैठता है।
  • इलेक्ट्रिक कार: एक सामान्य ईवी को फुल चार्ज करने में करीब 30-40 यूनिट बिजली लगती है (खर्च लगभग ₹300), जिससे वह 300 किमी तक चलती है। इस लिहाज से ईवी का खर्च महज ₹1 से ₹1.50 प्रति किलोमीटर आता है।

50,000 किलोमीटर के बाद कुल बचत

अब 50,000 किलोमीटर चलने के बाद ईंधन और चार्जिंग पर हुए कुल खर्च की तुलना देखिए। पेट्रोल कार में प्रति किमी खर्च ₹6.66 के हिसाब से कुल खर्च ₹3,33,000 तक पहुंचता है, जबकि ईवी में प्रति किमी ₹1.20 के हिसाब से चार्जिंग खर्च सिर्फ ₹60,000 आता है। यानी अकेले ईंधन पर ही करीब ₹2,73,000 की सीधी बचत हो जाती है।

सिर्फ ईंधन के खर्च पर ही ईवी आपके करीब ₹2,73,000 बचा देती है, जो इसकी बढ़ी हुई शुरुआती कीमत के एक बड़े हिस्से की भरपाई कर देता है।

मेंटेनेंस और सर्विसिंग का फर्क

पेट्रोल कार के मुकाबले इलेक्ट्रिक कार का रखरखाव बेहद सस्ता पड़ता है। दोनों का अंतर इस तरह समझिए—

  • पेट्रोल कार: इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, स्पार्क प्लग, कूलेंट और गियरबॉक्स के चलते हर 10,000 किमी पर सर्विसिंग का खर्च ₹5,000 से ₹8,000 तक आता है। 50,000 किमी तक यह खर्च ₹30,000 से ₹40,000 तक पहुंच जाता है।
  • इलेक्ट्रिक कार: ईवी में इंजन नहीं होता, इसलिए न ऑयल बदलना पड़ता है और न ही मूविंग पार्ट्स घिसते हैं। इसमें केवल टायर, ब्रेक पैड और एसी फिल्टर पर खर्च होता है। 50,000 किमी में इसका मेंटेनेंस खर्च पेट्रोल की तुलना में आधे से भी कम रहता है।

आपके लिए क्या बेहतर है?

50,000 किलोमीटर चलाने के बाद ईवी न सिर्फ अपने पेट्रोल वेरिएंट की अतिरिक्त कीमत वसूल कर लेती है, बल्कि फ्यूल और मेंटेनेंस मिलाकर करीब 3 लाख से ज्यादा रुपये बचाना भी शुरू कर देती है।

  • ईवी तब खरीदें: जब आपका रोजाना का सफर 50-60 किलोमीटर से ज्यादा हो, आप कार को 5-7 साल तक रखना चाहते हों और घर पर चार्जिंग की सुविधा मौजूद हो।
  • पेट्रोल कार तब खरीदें: जब आपकी सालाना रनिंग बहुत कम हो (महीने में 500 किमी से कम), बजट सीमित हो या आप अक्सर ऐसे लंबे रूट पर चलते हों जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी कमजोर है।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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