90 साल से वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी छिपकली बीकानेर की चाय की दुकान पर मिली राजस्थान एक दिन पहले 8
राजस्थान के बीकानेर में वैज्ञानिकों ने छिपकली की एक नई प्रजाति खोजी है, जिसे मेसालिना बिश्नोई नाम दिया गया है। यह प्रजाति पिछले 90 साल से केवल किताबों का हिस्सा बनी हुई थी।

अनूठी खोज की कहानी

राजस्थान के बीकानेर जिले ने जैव विविधता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिकों ने गजनेर इलाके में छिपकली की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसे मेसालिना बिश्नोई नाम दिया गया है। यह खोज भारत में मेसालिना जीनस का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है। दिलचस्प बात यह है कि यह छिपकली वैज्ञानिकों को तब मिली जब वे गजनेर के पास एक चाय की दुकान पर रुके थे।

चाय की दुकान पर वैज्ञानिक और छिपकली

अगस्त 2025 में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) की टीम गजनेर के अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र में सर्वे कर रही थी। शोधकर्ताओं ने बताया कि रास्ते में चाय पीने के लिए रुकते समय उनकी नजर एक छोटी सी छिपकली पर पड़ी। बाद में डीएनए और शारीरिक बनावट की जांच से यह स्पष्ट हो गया कि यह विज्ञान के लिए पूरी तरह नई प्रजाति है। शोधकर्ता धर्मेंद्र खंडाल के अनुसार, इस प्रजाति का नाम बिश्नोई समुदाय के वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण को सम्मान देने के लिए रखा गया है।

90 साल पुराना रहस्य

राजकीय डूंगर महाविद्यालय के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष 1935 में ब्रिटिश जीवविज्ञानी मैल्कम ए. स्मिथ ने जैसलमेर में मेसालिना जीनस की मौजूदगी का जिक्र किया था, लेकिन तब इसके कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल पाए थे। अब बीकानेर से मिले नमूनों के आधार पर सुमित रॉय और उनकी टीम ने इसे नई प्रजाति के रूप में प्रमाणित किया है।

कैसी दिखती है मेसालिना बिश्नोई

वैज्ञानिकों के अनुसार यह जीव बेहद छोटा और विशिष्ट है:

  • इसकी लंबाई लगभग 39.2 मिलीमीटर होती है।
  • इसका रंग स्लेटी से लेकर ऑलिव-भूरा होता है।
  • गर्दन से पूंछ तक दो स्पष्ट धारियां और आंखों के पीछे काले निशान इसे खास पहचान देते हैं।
  • शरीर के निचले हिस्से का रंग हल्का स्लेटी या मटमैला सफेद होता है।

थार के मरुस्थल में जैव विविधता

यह प्रजाति कठोर और पथरीली जमीन वाले शुष्क इलाकों में रहना पसंद करती है। गजनेर क्षेत्र में किए गए इस सर्वे में शोधकर्ताओं को सहगल गेको, स्पॉटेड डेजर्ट रेसर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे अन्य जीव भी मिले हैं। डॉ. प्रताप सिंह का मानना है कि थार का मरुस्थल अभी भी कई अनसुलझे रहस्यों और नई प्रजातियों का केंद्र है, जिनके लिए और अधिक व्यापक शोध की आवश्यकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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