डिजिटल पेमेंट का लोहा मान रहा अमेरिका, भारत के UPI मॉडल की जमकर हो रही चर्चा विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिका में अपनी भुगतान प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए चर्चा तेज हो गई है। इस दौरान अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने भारत के UPI को एक बेहतरीन और सफल डिजिटल मॉडल के रूप में सराहा है।

अमेरिका में भारत के डिजिटल मॉडल की गूंज

दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका भारत का यूपीआई (UPI) सिस्टम अब अमेरिका के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। हाल ही में वाशिंगटन में हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी की एक उपसमिति की बैठक में अमेरिकी भुगतान प्रणाली के भविष्य पर चर्चा हुई। इस दौरान विशेषज्ञों ने भारत की डिजिटल क्रांति का विशेष उल्लेख किया और बताया कि कैसे भारत ने अपने भुगतान ढांचे को आधुनिक बनाकर करोड़ों लोगों को इस सुविधा से जोड़ा है।

फिनटेक कंपनियों के लिए सीधा रास्ता

बैठक में फिनटेक कंपनी स्ट्राइप की वाइस चेयर एलीन ओमारा ने जोर देकर कहा कि जिन देशों ने अपने पेमेंट नेटवर्क को अधिक खुला बनाया है, वहां नवाचार में तेजी देखी गई है। उन्होंने भारत, ब्राजील, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत के यूपीआई ने जिस तरह डिजिटल लेनदेन को सरल और तेज बनाया है, वह अपने आप में एक मिसाल है। ओमारा के अनुसार, अमेरिका के पास फेडनाउ (FedNow) जैसी इंस्टेंट पेमेंट सुविधा तो है, लेकिन उसमें भारत जैसी सुविधाजनक परत या इकोसिस्टम की कमी है।

सार्वजनिक डिजिटल ढांचे की सफलता

अमेरिकी सांसद रशीदा तलीब ने भी इस सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित यूपीआई यह साबित करता है कि सार्वजनिक डिजिटल ढांचा किस तरह व्यवसायों और आम लोगों को सशक्त बना सकता है। बैठक में यह मुद्दा उठा कि अमेरिका को भी अपनी नियामक व्यवस्था में बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि गैर-बैंक भुगतान कंपनियों को फेडरल रिजर्व के नेटवर्क तक सीधी पहुंच मिल सके।

सुरक्षा और नियमों पर भी चर्चा

हालाँकि, सभी विशेषज्ञ एक मत नहीं थे। नेशनल कम्युनिटी रीइंवेस्टमेंट कोलिशन की तारा फ्लिन ने सुझाव दिया कि यदि गैर-बैंक कंपनियों को भुगतान प्रणाली तक पहुंच दी जाती है, तो उन्हें उपभोक्ता सुरक्षा और कड़े नियामकीय निरीक्षण के दायरे में लाना अनिवार्य होगा। कुल मिलाकर, चर्चा का निचोड़ यह रहा कि डिजिटल युग में अब अमेरिका को अपनी पुरानी बैंकिंग नीतियों से आगे बढ़कर भारत जैसे देशों के सफल प्रयोगों से सीखने की जरूरत है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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