अनुकंपा नौकरी पाकर बदल गई बेटी, 81 साल के बीमार पिता को घर से निकाला, खाने तक को मोहताज किया मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 42
भोपाल में एक पिता ने मृत पत्नी की जगह बेटों के बजाय बेटी को अनुकंपा नियुक्ति दिलाई, लेकिन नौकरी मिलते ही बेटी ने 81 वर्षीय लकवाग्रस्त पिता को घर से बाहर कर दिया। मामला कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में सामने आया, जहां कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।

बुढ़ापे में जिस संतान को माता-पिता अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं, जब वही उनकी सबसे बड़ी पीड़ा बन जाए तो हर संवेदनशील दिल कांप उठता है। हमारे समाज में माता-पिता अपनी जीवनभर की कमाई और अधिकार अपनी संतान के बेहतर भविष्य के लिए न्योछावर कर देते हैं, इस उम्मीद के साथ कि जब शरीर साथ छोड़ेगा तब यही बच्चे उनका सहारा बनेंगे। लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आया एक मामला रिश्तों के साथ-साथ इंसानियत को भी झकझोर देने वाला है।

जनसुनवाई में फूट पड़ा बुजुर्ग का दर्द

यह चौंकाने वाला मामला भोपाल कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई के दौरान सामने आया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे 188 आवेदनों के बीच एक बुजुर्ग अपनी पीड़ा सुनाते हुए रो पड़ा। ईदगाह हिल्स निवासी 81 वर्षीय पूरन सिंह यादव ने कलेक्टर के सामने न्याय की गुहार लगाते हुए बेहद भावुक आवेदन सौंपा।

बेटों को छोड़ बेटी को दिलाई थी नौकरी

पूरन सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी शासकीय सेवा में कार्यरत थीं। पत्नी की असामयिक मृत्यु के बाद उनके सामने अनुकंपा नियुक्ति का विकल्प आया। उनके बेटे भी थे, लेकिन उन्होंने बेटों के दावों को दरकिनार करते हुए अपनी बेटी हेमा यादव का भविष्य सुरक्षित करने का निर्णय लिया और बेटी को अनुकंपा नियुक्ति दिलवा दी, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।

दुखी मन से बुजुर्ग ने बताया कि नियुक्ति के समय बेटी हेमा ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उसने हाथ जोड़कर भरोसा दिलाया था कि वह जीवनभर अपने पिता और भाइयों का पूरा ध्यान रखेगी और परिवार में किसी चीज की कमी नहीं होने देगी। लेकिन नौकरी मिलते ही उसके तेवर पूरी तरह बदल गए और समय के साथ पिता के प्रति उसका व्यवहार हिंसक और संवेदनहीन होता चला गया।

घर से धक्के देकर निकाला, मकान पर कब्जा

आज स्थिति यह है कि उसी बेटी ने 81 वर्षीय बुजुर्ग पिता को उन्हीं के मकान से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया और पूरे घर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। पूरन सिंह ने अपनी शारीरिक मजबूरी बताते हुए कहा कि वे लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं। बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई होती है और इस हालत में उन्हें सहारे तथा देखभाल की सख्त जरूरत है।

बुजुर्ग के मुताबिक उनकी बेटी रहने की जगह देना तो दूर, खाने-पीने तक के लिए कुछ नहीं दे रही है, जिससे वे दाने-दाने को तरसने की कगार पर पहुंच गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि हेमा यादव के पास पहले से ही दो प्लॉट और शीतल नगर इलाके में अपना एक मकान मौजूद है। इसके बावजूद वह अपने मकान में रहने के बजाय बीमार पिता के घर पर जबरन काबिज है।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

बुजुर्ग पिता की इस मार्मिक और गंभीर शिकायत को सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लिया। त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्होंने आगे की जांच और उचित वैधानिक कार्रवाई के लिए एसडीएम बैरागढ़ को कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बुजुर्ग को उनका घर और हक वापस दिलाया जाएगा।

जनसुनवाई में पहुंचे 188 आवेदन

मंगलवार को आयोजित इस जनसुनवाई में कुल 188 आवेदन पहुंचे, जिनमें कई अन्य गंभीर मामलों की शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। बैराशिया निवासी बजरंग दास ने भी एक शिकायती आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैराशिया क्षेत्र में सचिव सुरेंद्र सिंह राजपूत निजी जमीन पर अवैध तरीके से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ बांट रहे हैं, जिससे इलाके में लगातार विवाद और दहशत का माहौल बना हुआ है। आरोप है कि बलवंत सिंह नामक व्यक्ति दूसरों की निजी जमीन पर पीएम आवास बनवा रहा है और सचिव उसे पूरा सहयोग दे रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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