रांची का ये है टॉप लॉ कॉलेज! फिल्मी सेट जैसा है यहां का कैंपस, पढ़ाई के बाद छात्र सुप्रीम कोर्ट में करते हैं वकालत करियर एक घंटा पहले 2
झारखंड की राजधानी रांची स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च ऑफ लीगल स्टडीज अपनी शानदार पढ़ाई और खूबसूरत कैंपस के लिए देशभर में मशहूर है। यहाँ के छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में वकालत का मुकाम हासिल करते हैं।

रांची का कानूनी शिक्षा का प्रमुख केंद्र

झारखंड की राजधानी रांची में स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च ऑफ लीगल स्टडीज वर्तमान समय में देश के शीर्ष लॉ कॉलेजों की सूची में अपना स्थान बनाए हुए है। यह शिक्षण संस्थान अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ ही अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है। रांची के कांके इलाके में स्थित यह कैंपस चारों ओर से घने जंगलों, खेतों और हरियाली से घिरा हुआ है, जो इसे किसी फिल्मी सेट जैसा खुशनुमा अहसास देता है।

एडमिशन की प्रक्रिया और चुनौतियां

इस प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रवेश पाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यहाँ अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए विद्यार्थियों को CLAT यानी कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। यह प्रवेश परीक्षा काफी चुनौतीपूर्ण होती है और इसमें दाखिला सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों को टॉप 100 की रैंक में जगह बनानी पड़ती है। इसके अलावा, शैक्षणिक पात्रता के रूप में 12वीं कक्षा में कम से कम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त होना आवश्यक है। वहीं, यदि कोई छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन यानी पीजी में दाखिला लेना चाहता है, तो उसे अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक हासिल करना अनिवार्य है। पीजी कोर्सेज में भी प्रवेश प्रक्रिया एंट्रेंस एग्जाम की रैंक और उसके बाद आयोजित होने वाली काउंसलिंग के माध्यम से ही पूरी होती है।

कैंपस की सुविधाएं और वातावरण

कॉलेज का कैंपस न केवल पढ़ाई के लिए बेहतरीन माहौल प्रदान करता है, बल्कि यह विद्यार्थियों की सुख-सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखता है। कैंपस के भीतर एक व्यवस्थित कैफेटेरिया मौजूद है, जहाँ छात्र समय बिता सकते हैं। इसके अलावा यहाँ छोटे-छोटे स्टॉल और नेस्कैफे जैसी चाय की दुकानें भी उपलब्ध हैं, जहाँ विद्यार्थी शाम के वक्त अपने साथियों के साथ चाय और स्नैक्स का आनंद लेते हैं। परिसर में रहने के लिए हॉस्टल की सुविधा भी दी गई है। हॉस्टल की खिड़कियों से बाहर दिखाई देने वाले पेड़, पहाड़ और जंगलों के मनोरम दृश्य विद्यार्थियों को मानसिक शांति प्रदान करते हैं। बरसात के दौरान तो यह पूरा इलाका इतना आकर्षक हो जाता है कि मानो किसी फिल्म की शूटिंग का दृश्य हो। चौड़ी सड़कें, ऊंचे पेड़ और हरियाली के कारण कई लोग यहां घूमने की इच्छा भी जाहिर करते हैं, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त होने के कारण बिना किसी ठोस कारण के बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है।

फीस का ढांचा और एजुकेशन लोन

इस संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने का सपना देख रहे छात्रों और उनके अभिभावकों को बजट का खास ध्यान रखना पड़ता है। यहाँ 4 साल के एलएलबी कोर्स के लिए कुल खर्च 12 से 15 लाख रुपये के बीच आता है। इतनी अधिक फीस का आंकड़ा सुनकर शायद कुछ छात्र सोच में पड़ जाएं, लेकिन कॉलेज की साख इतनी मजबूत है कि एक बार दाखिला हो जाने पर बैंक खुद छात्रों को एजुकेशन लोन मुहैया कराने के लिए तत्पर रहते हैं। बड़ी संख्या में छात्र एजुकेशन लोन लेकर ही अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं और भविष्य में एक सफल वकील के रूप में अपनी पहचान बनाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

इस कॉलेज की सबसे बड़ी ख्याति यह है कि यहाँ से निकलने वाले छात्र आगे चलकर देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। यहाँ का कठिन अनुशासन और उच्च स्तरीय कानूनी शिक्षा छात्रों को इस काबिल बनाती है कि वे देश के सबसे बड़े न्यायालय में वकालत का लोहा मनवा सकें। यह कॉलेज न केवल झारखंड बल्कि पूरे भारत के उन होनहार छात्रों के लिए एक सपना है, जो कानूनी पेशे में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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