सावन शिवरात्रि 2026: महादेव की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों और आरती का करें पाठ धर्म एक घंटा पहले 2
सावन शिवरात्रि का दिन भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए समर्पित है। इस अवसर पर शिवलिंग की विधि-विधान से उपासना और प्रभावशाली मंत्रों के जाप से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त पूरे भक्ति भाव के साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं। एक वर्ष में कुल 12 मासिक शिवरात्रि आती हैं, जिनमें फाल्गुन और सावन की शिवरात्रि का अत्यधिक धार्मिक महत्व माना गया है। आने वाली सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इस विशेष दिन पर महादेव की पूजा करने और जलाभिषेक करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उनकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। पूजा संपन्न करने के लिए शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाना चाहिए और इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शांतिपूर्ण मन से मंत्रों का जाप और आरती करना इस व्रत की पूर्णता के लिए अनिवार्य है।

भगवान शिव की आरती

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदा शिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे। हंसानन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज, चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखता, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला, वनमाला, रुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहे, भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघम्बर अंगे। सनकादिक, गरुणादिक, भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडलु, चक्र त्रिशूल धर्ता। जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विश्वनाथ विराजत, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठि भोग लगावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुण शिवजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

साधना के लिए प्रभावशाली मंत्र

शिवरात्रि की पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

  • शिव मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • रुद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
  • शिव गायत्री मंत्र: ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि तन्नः शिवः प्रचोदयात्॥
  • मृत्युञ्जय महादेव मंत्र: ॐ मृत्युञ्जय महादेव त्राहि मां शरणागतम्। जन्म-मृत्यु-जरा-व्याधिपीडितं कर्मबन्धनैः॥
  • दक्षिणामूर्ति शिव मंत्र: ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये। मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥
  • नीलकण्ठ महादेव मंत्र: ॐ नमो नीलकण्ठाय॥
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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