भरत तिवारी एनकाउंटर: FIR दर्ज होने के बाद भी DSP को मिली नई पोस्टिंग, सरकार के फैसले पर उठे सवाल बिहार 2 घंटे पहले 2
भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।

विवादों के बीच नई जिम्मेदारी

बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि बिहार सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाकर सबको हैरानी में डाल दिया है। राज्य सरकार द्वारा किए गए तबादलों की सूची में एक ऐसे पुलिस अधिकारी का नाम शामिल है, जो वर्तमान में हत्या के एक गंभीर मामले में कानूनी जांच का सामना कर रहे हैं। भरत तिवारी एनकाउंटर के दौरान जगदीशपुर के एसडीपीओ रहे राजेश कुमार शर्मा को अब बिहार पुलिस के नारकोटिक्स विभाग में डीएसपी के पद पर तैनात किया गया है।

घटना और FIR का घटनाक्रम

यह पूरा मामला 17 जून का है, जब शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर हुआ था। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि भरत तिवारी ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। इस घटना के बाद मामला काफी तूल पकड़ गया और दबाव बढ़ने के बाद 24 जून को राजेश कुमार शर्मा को उनके पद से हटाते हुए पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बढ़े सवाल

एनकाउंटर के बाद सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और भी ज्यादा जटिल बना दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मृतक भरत तिवारी के शरीर पर कुल पांच गोलियों के निशान थे। इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर न केवल स्थानीय लोगों ने बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए गए। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक इस एनकाउंटर में शामिल रहे सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेईमानी है।

राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर

राजेश कुमार शर्मा को नई पोस्टिंग मिलने के बाद से ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां कुछ लोग इसे सरकार की ओर से किया गया एक सामान्य तबादला बता रहे हैं, वहीं विपक्ष और मृतक के परिजन इसे एक प्रभावशाली पद पर तैनाती मानकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में नामजद आरोपी को एक महत्वपूर्ण विभाग में जिम्मेदारी सौंपना सही संदेश नहीं देता।

आगे की स्थिति

एक तरफ तो भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का यह फैसला प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगाता है। फिलहाल, भरत तिवारी के परिजन अभी भी न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। अब देखना यह होगा कि इस नई पोस्टिंग के बाद मामले की जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और कानूनी तौर पर इन अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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