भागलपुर का जर्दालू आम क्यों है इतना खास, जानें इसकी अनोखी पहचान की असली वजह बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के भागलपुर का जर्दालू आम अपनी मिठास और खुशबू के लिए मशहूर है और हर साल यह देश के गणमान्य लोगों को तोहफे के रूप में भेजा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यहां की काली दोमट मिट्टी और जलवायु ही इसे खास बनाती है।

बिहार का भागलपुर अपने जर्दालू आम, सिल्क और कतरनी चावल के लिए पूरे देश में पहचाना जाता है। इन तीनों में जर्दालू आम की पहचान सबसे अलग और खास मानी जाती है। अपनी बेमिसाल मिठास और सुगंध की वजह से यह आम सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी लोगों की पसंद बनता जा रहा है। यही वजह है कि हर साल यहां से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कई बड़े नेताओं को जर्दालू आम तोहफे के तौर पर भेजा जाता है।

आखिर क्यों खास है जर्दालू

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर इसी किस्म का पौधा वे अपने इलाके में लगा लें तो क्या वही स्वाद मिलेगा। आम पर रिसर्च करने वाले किसान अशोक चौधरी इसका जवाब देते हुए बताते हैं कि किस्म भले एक हो, लेकिन स्वाद एक जैसा नहीं रहता। उनके मुताबिक यहां जो जलवायु और मिट्टी है, वह दूसरी जगहों पर नहीं मिलती। उत्तर की दिशा में जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, इस आम का स्वाद फीका यानी पानी जैसा होता चला जाता है।

उनका कहना है कि इस आम को सबसे ज्यादा खास यहां की काली दोमट मिट्टी बनाती है, और इसी वजह से इसका स्वाद और सुगंध दोनों अनोखे होते हैं।

वैज्ञानिक की राय में मिट्टी है असली कारण

आम पर शोध करने वाली वैज्ञानिक फिजा अहमद बताती हैं कि भागलपुर का जर्दालू इसलिए खास है क्योंकि यहां की मिट्टी पूरी तरह अलग है। वे उदाहरण देते हुए कहती हैं कि बम्बई आम मूल रूप से यहां का नहीं है, फिर भी यहां उगने पर उसका स्वाद खास हो जाता है। इसकी वजह यही काली दोमट मिट्टी है, जो आम को विशेष बना देती है।

2016 से गणमान्य लोगों तक पहुंच रहा है यह आम

हर साल भागलपुर का यह खास आम देश के गणमान्य लोगों के पास भेजा जाता है, और यह जिले के मधुबन बगीचे से जाता है। अशोक चौधरी बताते हैं कि साल 2016 से जर्दालू ने खूब लोकप्रियता बटोरी। उसी साल यह पहली बार मुख्यमंत्री को सौगात के रूप में भेजा गया था, जिसके बाद वे भी इस आम के कायल हो गए। इसके बाद हर साल उन्हीं के माध्यम से यहां का आम देश के गणमान्य लोगों तक सौगात बनकर पहुंचने लगा और इस तरह यह और भी प्रसिद्ध हो गया।

उनका कहना है कि जिले में सुल्तानगंज प्रखंड का आम ही भेजा जाता है। इस मिट्टी के जर्दालू का स्वाद जहां खास होता है, वहीं दियारा क्षेत्र के जर्दालू का स्वाद इससे अलग हो जाता है। यही वजह है कि यहां का ही आम गणमान्य लोगों तक पहुंचाया जाता है।

खाने में सुपाच्य और शुगर भी कम

जर्दालू आम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे काटकर और चूसकर, दोनों ही तरीकों से खाया जा सकता है। इसका स्वाद बेहद मीठा होता है और इसमें रेशे भी कम पाए जाते हैं, जिससे यह आसानी से पच जाता है। खास बात यह भी है कि इतना मीठा होने के बावजूद इसमें शुगर लेवल काफी कम रहता है और यह आम पूरी तरह सुपाच्य होता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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