तमिलनाडु की राजनीति में हलचल: अन्नामलाई ने भाजपा से नाता तोड़ा, 'वी द लीडर्स' से कुछ घंटों में जुड़े लाखों लोग भारत एक घंटा पहले 3
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा देकर नया राजनीतिक आंदोलन 'वी द लीडर्स' शुरू किया है, जिसे लॉन्च के चंद घंटों में ही 10 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिल गया।

तमिलनाडु की सियासत में उस समय बड़ी हलचल मच गई, जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से औपचारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। पद छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने 'वी द लीडर्स' नाम से एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू किया, जिसने शुरुआत के कुछ ही घंटों में 10 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी ओर खींच लिया और लोगों के जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है। अन्नामलाई ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सस्टेनिबिलिटी और युवा नेतृत्व को लेकर उत्साही लोगों से अपने अभियान से जुड़ने की अपील की और इसे एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बताया।

अन्नामलाई का ट्वीट

अन्नामलाई ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का मकसद आम आदमी की राजनीति को बताया है। पार्टी के औपचारिक ऐलान से पहले ही इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में सरगर्मी पैदा कर दी है। उन्होंने ट्वीट किया, "हमारे राजनीतिक आंदोलन ने एक मील का पत्थर हासिल किया है, महज 10 घंटों में 10 लाख से अधिक नेताओं ने पंजीकरण कराया है। यह असाधारण प्रतिक्रिया हमारे साझा दृष्टिकोण और सामूहिक मिशन में बढ़ते विश्वास का सशक्त प्रमाण है। मैं इस आंदोलन पर भरोसा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।"

'वी द लीडर्स' नाम का आंदोलन

अन्नामलाई भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं। पुलिस सेवा छोड़कर वे राजनीति में आए और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में अपनी नई पार्टी 'वी द लीडर्स' की आधिकारिक वेबसाइट का लिंक साझा किया। उनके इस आंदोलन को कुछ ही घंटों में लाखों लोगों का समर्थन मिल गया। पोस्ट के कैप्शन में अन्नामलाई ने लिखा, 'आइए आगे बढ़ें, कदम उठाएं और बदलाव लाएं। हमारे राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने के लिए यहां जुड़ें।'

कौन हैं अन्नामलाई?

के. अन्नामलाई ने अपना नाम खुद 10वीं कक्षा में चुना था। बचपन में उनके माता-पिता ने उनका नाम शिवा सेंथिल कुमार रखा था, जिसके चलते उनका पूरा नाम 'अन्नामलाई शिवा सेंथिल कुमार' हो गया था, मगर यह नाम स्कूल सर्टिफिकेट के लिए काफी लंबा पड़ रहा था। जब 10वीं कक्षा में उनसे नाम को लेकर पसंद पूछी गई, तो उन्होंने इसमें से छोटा नाम 'अन्नामलाई' चुन लिया। साल 2020 में एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने नाम का अर्थ बताते हुए कहा था कि यह भगवान शिव के रौद्र रूप का नाम है।

भाजपा में कैसे पहुंचे अन्नामलाई?

साल 2020 में प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर अन्नामलाई ने सिविल सर्विस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें तमिलनाडु में राज्य भाजपा का उपाध्यक्ष बनाया गया और इसके बाद पार्टी का प्रदेश प्रमुख भी नियुक्त कर दिया गया। उस समय उनकी उम्र महज 37 साल थी। आगे चलकर उन्हें 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में चुनाव सह-प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

अन्नामलाई ने क्यों छोड़ा भाजपा का साथ?

अप्रैल 2025 में पार्टी आलाकमान ने अन्नामलाई को अध्यक्ष पद से हटा दिया था। इसके बाद उन्हें 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के प्रचार और अहम फैसलों की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया। इससे नाराज होकर उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की कुछ नीतियों पर खुलकर सवाल भी उठाए थे। तल्खी तब और बढ़ गई, जब उम्मीदवार चुनने, सीटों के बंटवारे और गठबंधन संभालने जैसे मामलों में उन्हें नजरअंदाज किया गया।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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