अब बेकार नहीं जाएगी आम की गुठली: बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने तैयार किए बटर, तेल और पाउडर बिहार एक महीने पहले 45
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने आम की गुठली से बटर, तेल और पाउडर बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे अब किसानों और आम लोगों को गुठलियों के भी उचित दाम मिलेंगे।

आम के साथ अब गुठली भी होगी फायदेमंद

आपने अक्सर बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि आम के आम और गुठली के दाम. यह पुरानी कहावत अब हकीकत में बदलती हुई दिखाई दे रही है. अक्सर हम आम का स्वाद लेने के बाद उसकी गुठली को कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन अब ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा शानदार शोध किया है, जिससे आम की गुठली अब एक मूल्यवान उत्पाद बन गई है. अब इस गुठली से बटर, तेल और पाउडर जैसे उपयोगी पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं.

वैज्ञानिकों की अनूठी पहल

बिहार कृषि विश्वविद्यालय अपने किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नए-नए प्रयोगों में जुटा रहता है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम ने आम की गुठली का उपयोग करके कई प्रकार के उत्पाद विकसित किए हैं. इस शोध का मुख्य उद्देश्य ऐसी चीजों को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाना है जिन्हें अब तक केवल कचरा समझकर बाहर फेंक दिया जाता था. वैज्ञानिक कंचन कुमारी ने इस नवाचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

कैसे तैयार किए गए ये उत्पाद

इस शोध के पीछे की कहानी बताते हुए वैज्ञानिक कंचन कुमारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में एक वैज्ञानिक एक उत्पाद की थीम पर कुलपति के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया जा रहा है. उनकी टीम मुख्य रूप से फूड साइंस पर काम करती है. विश्वविद्यालय में जब आम का जूस बनाया जाता था, तब बड़ी मात्रा में गुठलियां बर्बाद हो जाती थीं. इसी बर्बादी को देखते हुए उन्होंने गुठली के बेहतर इस्तेमाल पर रिसर्च शुरू किया.

शोध प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और कई बार असफलता भी मिली, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी. प्रक्रिया के तहत:

  • सबसे पहले आम की गुठलियों को एकत्रित किया गया.
  • इन्हें अच्छी तरह साफ करके ड्रायर की मदद से सुखाया गया.
  • गुठली के अंदर मौजूद गिरी, जो एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर होती है, उसे निकाला गया.
  • लंबे शोध के बाद इस गिरी से बटर, तेल और पाउडर बनाने में सफलता प्राप्त हुई.

बदल जाएगा गुठलियों का बाजार

इस शोध के परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं. वैज्ञानिक कंचन कुमारी के अनुसार, आम की गुठली से तैयार बटर का उपयोग खाद्य पदार्थों में किया जा सकेगा. वहीं, इससे निकला तेल और पाउडर विशेष रूप से कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में बहुत उपयोगी साबित होगा. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब बीएयू उन लोगों को गुठली जमा करने का मेहनताना भी प्रदान करेगा जो इन्हें विश्वविद्यालय तक पहुंचाएंगे. यानी अब आम की गुठली केवल फेंकने वाली चीज नहीं, बल्कि कमाई का एक नया जरिया बन गई है.

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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