पशुपालकों के लिए वरदान है यह बहुवर्षीय घास, मेड़ पर लगाएं और 5 साल तक पाएं भरपूर दूध और हरा चारा बिहार एक घंटा पहले 2
बिहार के पश्चिम चंपारण के कृषि वैज्ञानिक ने पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक और उपयोगी चारे की किस्मों की जानकारी दी है, जिससे पशुओं की दूध उत्पादकता और इम्युनिटी में भारी बढ़ोतरी होगी।

पशुपालन को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए सबसे जरूरी है पशुओं को सही समय पर पौष्टिक और पर्याप्त हरा चारा मिलना। अक्सर देखा जाता है कि किसान और पशुपालक चारे की कमी के कारण परेशान रहते हैं, विशेषकर सर्दियों के मौसम में। इस समस्या के समाधान के लिए बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के माधोपुर स्थित देशी गो वंश संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रंजन ने एक बेहद व्यावहारिक और आसान तरीका सुझाया है। उनका कहना है कि किसान अपने खेतों की मेड़ों पर एक खास बहुवर्षीय घास उगाकर लगातार 5 साल तक के लिए चारे की चिंता से मुक्ति पा सकते हैं। इससे न केवल चारे की कमी दूर होगी, बल्कि दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में भी भारी वृद्धि होगी।

नेपियर घास: खेतों की मेड़ पर उगाएं और 5 साल तक पाएं भरपूर चारा

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रंजन के अनुसार, नेपियर घास पशुओं के लिए एक अत्यंत पौष्टिक और पसंदीदा आहार है। इस घास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी विशेष उपजाऊ भूमि की आवश्यकता नहीं होती। इसे सूखे और बंजर इलाकों में भी बेहद आसानी से उगाया जा सकता है। जिन किसानों के पास खेत में अतिरिक्त जगह नहीं है, वे इसे अपने खेत की मेड़ों पर लगा सकते हैं।

नेपियर घास की बुवाई के लिए जुलाई से लेकर अगस्त का महीना सबसे उत्तम माना जाता है। इसे महज 10 धुर जितनी छोटी जगह में भी लगाया जा सकता है। बुवाई के केवल दो से तीन महीने के भीतर ही यह पहली कटाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार इसे लगाने के बाद लगातार 4 से 5 साल तक इससे हरे चारे की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।

नेपियर घास में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं। जब दुधारू पशु नियमित रूप से इस घास का सेवन करते हैं, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत होती है। तंदुरुस्त रहने के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता बढ़ जाती है और वे सुबह-शाम बाल्टी भरकर दूध देने लगते हैं।

ज्वार: पशुओं के शरीर में पानी की कमी को करेगा दूर

वैज्ञानिकों के मुताबिक, नेपियर के अलावा ज्वार भी पशुओं के लिए एक बेहतरीन और पौष्टिक चारा साबित होता है। ज्वार खिलाने से पशुओं के शरीर में कभी भी पानी की कमी नहीं होती है। इस चारे में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो पशुओं के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती है और दूध के उत्पादन को बढ़ाने में सीधे मदद करती है।

हालांकि, ज्वार खिलाते समय पशुपालकों को एक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशुओं को केवल हरे-भरे ज्वार के भूसे ही खिलाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें इसका पूरा पोषण मिल सके और किसी प्रकार का नुकसान न हो।

बरसीम घास: प्रोटीन का पावरहाउस और पचाने में आसान

सर्दियों के मौसम में पशुओं के लिए बरसीम घास को सबसे लोकप्रिय और सबसे पौष्टिक हरे चारे के रूप में देखा जाता है। इसकी गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें रेशे की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि प्रोटीन का स्तर 20 से 21 प्रतिशत तक होता है। यही कारण है कि पशु इस घास को बड़े चाव से खाते हैं और किसान भी इसे उगाना बहुत पसंद करते हैं।

बरसीम की पाचनशीलता लगभग 75 फीसदी तक होती है, जिससे यह पशुओं के पेट के लिए बेहद सुपाच्य होती है। यह पशुओं के स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने और उनकी दूध उत्पादन क्षमता को स्थिर रखने में सहायक है। बरसीम की बुवाई का सबसे सही समय अक्टूबर का दूसरा सप्ताह होता है। एक बार बोने के बाद इसकी फसल बहुत तेजी से बढ़ती है और हर 40 दिन के अंतराल पर इसकी कटाई की जा सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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