राजस्थान
5 घंटे पहले
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रिटायरमेंट के मौके पर होने वाले कई आयोजन आपने देखे होंगे, लेकिन बारां जिले के अंता का यह नजारा कुछ अलग ही था। सेना में अपनी सेवा पूरी कर जब कस्बे का बेटा लेखराज चोपड़ा घर लौटा तो उनके स्वागत में पूरा कस्बा उमड़ पड़ा। फौजी के सम्मान में पूरे कस्बे में तिरंगा यात्रा निकाली गई और जगह-जगह फूल बरसाकर उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
कस्बेवासियों का यह उत्साह और स्नेह देखकर घर लौटे फौजी की आंखें भी भर आईं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शामिल रहे चोपड़ा ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें इतना प्यार मिलेगा। उन्होंने कहा कि वे जीवन भर कस्बे के लोगों के ऋणी रहेंगे।
20 साल की सेवा और ऑपरेशन सिंदूर में भागीदारी
अंता की नील कंठ कॉलोनी निवासी लेखराज चोपड़ा तीन दिन पहले 31 मई को सेना में हवलदार के पद से रिटायर हुए। वे 1 जून को अपने घर अंता पहुंचे। मूल रूप से अंता के पास स्थित बालदड़ा गांव के रहने वाले लेखराज ने वर्ष 2006 में सेना में भर्ती ली थी।
6 राजपूत बटालियन के जवान रहे चोपड़ा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का हिस्सा भी रहे हैं। बीते दो साल से वे जम्मू-कश्मीर के पूंछ एलओसी पर तैनात थे। इससे पहले वे राजौरी और चीन सीमा के नजदीक सिक्किम में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेना में रहते हुए उन्हें लेबनान जाने का अवसर भी मिला।
ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से बंधा समां
लेखराज के अंता पहुंचने पर कस्बे में तिरंगा रैली निकाली गई। विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह इस रैली पर फूल बरसाए। घंटों तक पूरा कस्बा भारत माता की जय और भारतीय सेना के जयकारों से गूंजता रहा।
उनके सम्मान में निकली यह तिरंगा रैली बंबोरी बालाजी मंदिर से शुरू हुई। यहां बालाजी की पूजा-अर्चना के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ रैली रवाना हुई। कस्बे की महिलाओं ने फौजी का अभिनंदन किया। मुख्य बाजार से होती हुई रैली नील कंठ कॉलोनी पहुंची, जहां जमकर आतिशबाजी की गई। रैली में युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
परिवार में सेना की परंपरा
लेखराज के पिता रामदयाल चोपड़ा भी सेना से सेवानिवृत्त हैं और 3 राजपूत बटालियन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। चार भाइयों में दूसरे नंबर के लेखराज के दो बच्चे हैं, जो फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं।
लेखराज का कहना है कि कस्बेवासियों ने जो प्यार और सम्मान दिया, उसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। लोगों के इस सम्मान ने उनकी 20 साल की थकान को पल भर में मिटा दिया। उन्होंने कहा कि सेना जैसी कोई दूसरी संस्था नहीं है और देश के युवाओं को सेना में जरूर जाना चाहिए, क्योंकि यह बड़े सौभाग्य की बात है।
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