देवघर के किसान ने बांस की खेती से बदली अपनी तकदीर, एक सोच से हर महीने हजारों की कमाई झारखंड एक घंटा पहले 2
देवघर के किसान अंबिका जी ने सब्जियों के लिए हर साल बांस खरीदने के बजाय करीब एक एकड़ जमीन में खुद बांस उगाना शुरू किया, जो अब उनकी अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया बन गया है। आज एक बांस करीब 200 रुपये तक बिकता है और इससे उन्हें हर महीने अच्छी कमाई हो रही है।

कई बार खेती में कामयाबी किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि एक छोटे से विचार से मिल जाती है। देवघर प्रखंड के किसान अंबिका जी की कहानी भी इसी बात की मिसाल है। पहले उन्हें अपनी सब्जियों की खेती के लिए हर साल बांस खरीदना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाना पड़ता था। खेत में मचान बनाने, फसलों को सहारा देने और घेराबंदी करने के लिए बड़ी मात्रा में बांस की जरूरत होती थी। आखिरकार उन्होंने सोचा कि जब हर साल बांस चाहिए ही, तो क्यों न इसकी खेती खुद ही की जाए। इसी सोच ने उनकी खेती की दिशा बदल दी और आज वही बांस उनके लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गया है।

क्या कहते हैं किसान

अंबिका जी ने बताया कि उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन में बांस का पौधारोपण किया था। शुरुआत में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर इससे इतनी अच्छी आमदनी होने लगेगी। धीरे-धीरे पौधे बड़े हुए और बांस तैयार होने लगा। अब हाल यह है कि उनके खेत में तैयार होने वाले बांस की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। गांव और आसपास के इलाकों के किसान खेती के अलग-अलग कामों के लिए उनसे बांस खरीदने पहुंचते हैं।

मौजूदा समय में एक बांस करीब 200 रुपये तक बिक जाता है, जिससे उन्हें हर महीने अच्छी अतिरिक्त आय हो जाती है। खेती के साथ-साथ बांस की बिक्री से होने वाली यह कमाई उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रही है।

बिक्री के साथ खेती में भी काम आता है बांस

बांस की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका इस्तेमाल खेती के कई अहम कामों में होता है। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को मचान बनाने के लिए बड़ी संख्या में बांस की जरूरत पड़ती है। लौकी, करेला, नेनुआ, खीरा और दूसरी बेल वाली फसलों के लिए मजबूत मचान तैयार करने में बांस को सबसे उपयोगी सामग्री माना जाता है।

इसके अलावा खेतों की घेराबंदी करने, पौधों को सहारा देने और कई दूसरे कृषि कार्यों में भी बांस का व्यापक उपयोग होता है। यही वजह है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और किसानों को इसे बेचने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती।

अब बांस खरीदने की जरूरत नहीं

अंबिका जी का कहना है कि बांस की खेती ने उनकी कई समस्याएं हल कर दी हैं। अब उन्हें अपनी खेती के लिए अलग से बांस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। जब भी जरूरत होती है, वे अपने ही खेत से बांस निकालकर इस्तेमाल कर लेते हैं। इससे खेती की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि बांस सिर्फ खेती के काम ही नहीं आता, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे जलावन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जब रसोई गैस की कीमतें बढ़ जाती हैं या किसी वजह से ईंधन की जरूरत होती है, तब बांस काफी काम आता है। यानी एक ही फसल से उन्हें कई तरह के फायदे मिल रहे हैं।

जरूरत को समझकर खेती से बढ़ता है मुनाफा

अंबिका जी का मानना है कि अगर किसान अपनी जरूरतों को समझकर खेती करें, तो कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। उनके मुताबिक कई बार जरूरत ही सबसे अच्छा विचार दे देती है। जिस बांस को वे पहले बाजार से खरीदकर लाते थे, आज वही बांस उनकी आय का बड़ा स्रोत बन गया है।

उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। थोड़ी दूरदर्शिता, सही योजना और जरूरत के मुताबिक फसल का चयन करके किसान अपनी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी कर सकते हैं। देवघर के किसान अंबिका जी की बांस की खेती इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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