बागेश्वर में मूसलाधार बारिश से सरयू उफान पर, प्रशासन ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट उत्तराखंड एक घंटा पहले 5
उत्तराखंड के बागेश्वर में भारी बारिश के चलते सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। प्रशासन ने एहतियातन घाट खाली करा दिए हैं और कई रास्ते बंद होने से जनजीवन प्रभावित है।

बागेश्वर में प्रकृति का रौद्र रूप

देवभूमि उत्तराखंड में इस समय मॉनसून का कहर जारी है। बागेश्वर जिले में शुक्रवार की सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। मौसम विभाग ने बागेश्वर के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है और कई स्थानों पर सामान्य गतिविधियां थम सी गई हैं।

सरयू नदी का बढ़ा जलस्तर

लगातार बारिश के कारण सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी को उफान पर देखकर प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से नदी किनारे स्थित प्रसिद्ध घाटों और निचले इलाकों में बसी बस्तियों को खाली करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना बेहद जरूरी था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

सड़कें बंद और यातायात ठप

बारिश के कारण केवल नदियां ही नहीं बल्कि यातायात की स्थिति भी बिगड़ गई है। जिले में कई महत्वपूर्ण ग्रामीण मोटर मार्ग मलबे की चपेट में आने के कारण बंद हो गए हैं। कपकोट से लेकर जिला मुख्यालय तक के संपर्क मार्ग बाधित होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक टनल के निकट भारी मात्रा में मलबा आने से यातायात पूरी तरह से रुक गया है, जिससे वाहन फंस गए हैं और आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित है।

प्रशासन की निगरानी और सावधानी

जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बचाव दलों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और नदी के पास जाने या पहाड़ी रास्तों पर अनावश्यक यात्रा करने से बचें। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल अलर्ट की स्थिति को बरकरार रखा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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