उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
एसआईटी की प्रमुख सिफारिशें
अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। एसआईटी ने मुख्य रूप से निम्नलिखित सिफारिशें की हैं:
- मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का हर सप्ताह यानी वीकली ऑडिट किया जाए।
- प्रतिदिन मंदिर में आने वाली नकदी का सटीक हिसाब रखा जाए और उसकी नियमित एंट्री सुनिश्चित हो।
- मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन हो और सभी सदस्यों की जवाबदेही तय की जाए।
- ट्रस्ट के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी को CEO के तौर पर नियुक्त किया जाए।
- मंदिर प्रबंधन को और अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में काम किया जाए।
- सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का स्टोरेज 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन किया जाए।
- ट्रस्ट के संचालन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो।
- मामले की विस्तृत जांच जारी रखने के लिए एसआईटी ने और समय की मांग की है।
- जिम्मेदार लोगों के अयोध्या से बाहर जाने पर रोक लगाई जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई
इस पूरे मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में आज सुनवाई होने वाली है। एक जनहित याचिका के माध्यम से मांग की गई है कि इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग रखी है कि मंदिर के दान का ऑडिट कैग यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के माध्यम से कराया जाए। गौरतलब है कि इससे पहले 19 जून को समय के अभाव के कारण अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी थी।
राजनीतिक बयानबाजी
इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल हमेशा से हिंदू आस्था और मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाते रहे हैं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया है और एसआईटी निष्पक्ष रूप से इसकी जांच कर रही है।
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