मुर्गी पालन करने वालों के लिए जरूरी सलाह, बरसात के मौसम में बीमारियों से ऐसे बचाएं अपना पोल्ट्री फार्म बिहार एक घंटा पहले 5
अगस्त के महीने में लगातार हो रही बारिश के कारण मुर्गियों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए विशेषज्ञ ने कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

बरसात के दौरान पोल्ट्री प्रबंधन

अगस्त का महीना पोल्ट्री फार्मिंग यानी कुक्कुट पालन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। अधिक बारिश और उमस की वजह से मुर्गियों के बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। केवीके बेगूसराय के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विपिन ने पोल्ट्री मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने पक्षियों की सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतें।

बिछौने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान

फार्म के भीतर नमी और गंदगी बीमारियों को न्योता देती है। विशेषज्ञ का कहना है कि मुर्गियों के बिछौने यानी लिटर को हर दिन अच्छी तरह उलट-पुलट करना चाहिए। इससे फार्म में नमी का स्तर कम बना रहता है। साथ ही, बिछौने में चूना या फिटकरी का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जिससे हानिकारक अमोनिया गैस के प्रभाव को कम किया जा सके।

पानी और खान-पान का सही प्रबंधन

दूषित पानी से मुर्गियों में संक्रमण तेजी से फैलता है। संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका पानी का शुद्धिकरण है। इसके लिए 1000 लीटर पानी में 2 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर ही मुर्गियों को पिलाया जाना चाहिए। इसके अलावा, मुर्गियों को दिए जाने वाले दाने का भंडारण भी सही ढंग से होना चाहिए। चारे को हमेशा दीवार से दूर रखें ताकि वह सीलन से बचा रहे। दिन भर में 2 से 3 बार थोड़ा-थोड़ा दाना देने से चारा बर्बाद नहीं होता और मुर्गियों को ताजा भोजन मिलता है।

बीमारियों से सुरक्षा और टीकाकरण

रानीखेत जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव का सबसे पक्का तरीका टीकाकरण है। पोल्ट्री पालकों को समय पर सभी जरूरी टीके लगवाने चाहिए ताकि नुकसान से बचा जा सके। बारिश के मौसम में इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर मुर्गियों के स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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