भारत-पाकिस्तान के बीच सुलह की कोशिश, कोलंबो और बैंकॉक में हुई दो सीक्रेट बैठकें विश्व 2 महीने पहले 86
भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक बातचीत बंद होने के बावजूद, हाल ही में श्रीलंका और थाईलैंड में ट्रैक-2 कूटनीतिक वार्ता के दौर आयोजित किए गए हैं। इन अनौपचारिक बैठकों का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और संवाद के रास्ते तलाशना है।

तनाव के बीच ट्रैक-2 वार्ता का दौर

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट के बीच एक नई हलचल देखने को मिली है। इस हफ्ते श्रीलंका की राजधानी कोलंबो और थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ट्रैक-2 कूटनीतिक वार्ता के नए दौर आयोजित हुए। इन बैठकों में दोनों देशों के पूर्व सैन्य अधिकारी, राजनयिक, पत्रकार और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित बड़े तनाव को रोकने के लिए संवाद का तंत्र बनाए रखना है।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठकों में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने आतंकवाद और जल संसाधनों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। विशेषज्ञों का मानना है कि औपचारिक सरकारी बातचीत (ट्रैक-1) के रास्ते भले ही फिलहाल बंद हों, लेकिन ऐसी अनौपचारिक चर्चाओं के जरिए गलतफहमियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। इन बैठकों का एक प्रमुख लक्ष्य यह भी है कि इन चर्चाओं से निकले सुझावों को आधिकारिक स्तर तक कैसे पहुंचाया जाए।

क्यों ठप है आधिकारिक बातचीत

दोनों देशों के बीच मई 2025 के बाद से आधिकारिक स्तर पर कोई भी वार्ता नहीं हुई है। उस दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 20 से अधिक पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक गोलीबारी और ड्रोन हमलों का सिलसिला चला था। 10 मई को हुए युद्धविराम के बाद से व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध न्यूनतम स्तर पर हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई किए बिना पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत संभव नहीं है।

लगातार जारी है बैक-चैनल संवाद

यह कोई पहली बार नहीं है जब दोनों देशों ने तटस्थ स्थानों पर ऐसी बैठकें की हैं। इससे पहले दोहा समेत पश्चिम एशिया के कई शहरों में भी ट्रैक-2 वार्ताएं हो चुकी हैं। हालांकि, दोनों देशों की सरकारें आधिकारिक तौर पर इन बैठकों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करती हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि अनौपचारिक संवाद के ये रास्ते ही एकमात्र जरिया हैं जो तनाव के समय में भी दोनों देशों के बीच बातचीत का दरवाजा खुला रखते हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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