मेरठ के बहसूमा में स्थित राजा नैन सिंह का दीवाने खास: 18वीं सदी की वास्तुकला का बेजोड़ नमूना उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 55
राजस्थान ही नहीं, उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में भी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है। बहसूमा गांव में स्थित राजा नैन सिंह का 'दीवाने खास' अपनी प्राचीन वास्तुकला और न्याय व्यवस्था के गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है।

इतिहास के पन्नों में छिपा मेरठ का गौरव

जब भी भारत में किलों और राजसी महलों की चर्चा होती है, तो लोगों का ध्यान अक्सर राजस्थान की ओर जाता है। हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती पर भी ऐसे कई ऐतिहासिक केंद्र मौजूद हैं जो अपनी समृद्ध विरासत को आज भी संजोए हुए हैं। मेरठ से लगभग 60 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर क्षेत्र के बहसूमा गांव में स्थित राजा नैन सिंह का दीवाने खास ऐसी ही एक अनमोल धरोहर है। 18वीं शताब्दी में निर्मित यह स्थान उस दौर की संस्कृति और सभ्यता की कहानी बयां करता है।

न्याय का केंद्र था यह ऐतिहासिक भवन

इतिहास के जानकारों के अनुसार, राजा नैन सिंह ने इस भवन का निर्माण विशेष रूप से जनसुनवाई और न्याय के लिए करवाया था। जिस प्रकार आज के समय में न्यायालय कार्य करते हैं, उसी प्रकार उस दौर में राजा इसी इमारत में बैठकर अपनी प्रजा की फरियाद सुनते थे और महत्वपूर्ण निर्णय लिया करते थे। यही कारण है कि इसे 'दीवाने खास' के रूप में जाना जाता है।

वास्तुकला और प्राकृतिक वातानुकूलन का संगम

इस महल की निर्माण शैली आज के इंजीनियरों के लिए भी शोध का विषय हो सकती है। उस दौर में जब आधुनिक मशीनों का अस्तित्व नहीं था, तब इस महल को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता था।

  • महल के भीतर बने विशेष रोशनदानों के माध्यम से प्रकाश और ताजी हवा का संचार महल के हर कोने तक होता था।
  • इसकी छत का निर्माण घुमावदार आकार में किया गया है, जो महल के तापमान को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है।

महाभारत कालीन मंदिरों का जीर्णोद्धार

राजा नैन सिंह केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि धार्मिक धरोहरों के संरक्षक भी थे। उन्होंने हस्तिनापुर क्षेत्र के कई प्राचीन और महाभारत कालीन मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया था। इनमें प्रमुख रूप से पांडेश्वर मंदिर, द्रौपदी मंदिर और फिरोजपुर स्थित सिद्ध पीठ शिव मंदिर शामिल हैं।

पर्यटन के लिए उभरती संभावना

आज भी इस क्षेत्र में राजा नैन सिंह के शासनकाल की कई निशानियां देखने को मिलती हैं। यदि विरासत विभाग इस दीवाने खास का उचित संरक्षण और रखरखाव करे, तो यह उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है। यह स्थान उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है जो प्राचीन भारतीय वास्तुकला और गौरवशाली इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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