हिमाचल प्रदेश
2 घंटे पहले
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इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार और हिमाचल पथ परिवहन निगम का पूरा ध्यान अब इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और उससे जुड़ी जरूरी सुविधाओं के विस्तार पर है। इसी कड़ी में प्रदेश भर में एक व्यापक चार्जिंग नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। हाल ही में उप-मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल पथ परिवहन निगम के आला अधिकारियों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक की, जिसमें परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
122 करोड़ रुपये का निवेश और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार ने प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों को सुचारू रूप से चलाने के लिए 122 करोड़ रुपये की बड़ी राशि का प्रावधान किया है। इस बजट के माध्यम से प्रदेश के 80 स्थानों पर कुल 99 चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इन चार्जिंग स्टेशनों को एचआरटीसी के प्रमुख बस अड्डों और वर्कशॉप परिसरों में विकसित किया जा रहा है ताकि बसों को यात्रा के दौरान आसानी से चार्ज किया जा सके।
कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि अब तक 34 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं और कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 21 स्थानों पर काम अंतिम चरण में है और अगले एक माह के भीतर इन्हें चालू कर दिया जाएगा। शेष 25 स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इन स्टेशनों पर 180 किलोवाट क्षमता वाले अत्याधुनिक फास्ट सीसीएस-2 चार्जर लगाए जा रहे हैं, जो बसों को तेजी से चार्ज करने में सक्षम हैं।
परिचालन लागत में भारी बचत
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि यह आर्थिक दृष्टि से भी परिवहन निगम के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में निगम के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जो प्रदेश के विभिन्न छोटे और बड़े रूटों पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन बसों के संचालन से निगम को पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में प्रति किलोमीटर 15 से 16 रुपये की सीधी बचत हो रही है। इस बचत के कारण निगम के कुल परिचालन खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है, जो कि राज्य की वित्तीय स्थिति के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
लंबी दूरी के रूटों पर सफल परीक्षण
इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता और रेंज को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इनका प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। सामान्य तौर पर एक बार फुल चार्ज होने पर ये बसें लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम हैं। हालांकि, वास्तविक संचालन के दौरान इनके परिणाम और भी प्रभावशाली रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, हरोली से चंडीगढ़ के बीच करीब 270 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक बसें बिना किसी परेशानी के सफलतापूर्वक चल रही हैं। इसी तरह, शिमला-चंडीगढ़-शिमला जैसे पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण रूट पर भी लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा के बाद भी बस की बैटरी में 25 प्रतिशत चार्ज शेष बच रहा है, जो इसकी दक्षता को दर्शाता है।
भविष्य की रणनीति
सरकार का स्पष्ट मानना है कि चार्जिंग की सुविधा केवल बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। भविष्य में जरूरत के हिसाब से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और अधिक बस अड्डों पर भी ये सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एचआरटीसी चरणबद्ध तरीके से अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर रहा है ताकि यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान किया जा सके। बुनियादी ढांचे के इस विस्तार से हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा बदलने की पूरी संभावना है।
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