राष्ट्रीय राजनीति
5 घंटे पहले
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बेंगलुरु में बंद कमरे में हुई लंबी बातचीत
बेंगलुरु में देश के बड़े उद्योगपति गौतम अदाणी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच एक बंद कमरे में हुई एक घंटे की मुलाकात ने राज्य की सक्रिय राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। जहां कांग्रेस पार्टी के नेता अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर अदाणी समूह की कार्यशैली और केंद्र सरकार के साथ उनके संबंधों पर सवाल खड़े करते रहे हैं, वहीं कर्नाटक में हुई इस मुलाकात ने एक बार फिर उद्योग जगत और सत्ता के गलियारों के बीच के संबंधों को चर्चा का विषय बना दिया है। गौतम अदाणी, जो आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम के एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बेंगलुरु आए थे, कार्यक्रम संपन्न होने के बाद सीधे मुख्यमंत्री के सदाशिवनगर स्थित सरकारी आवास पर पहुंचे। यद्यपि मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने इसे मात्र एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल एक औपचारिक मेलजोल मानने से इनकार कर रहे हैं।
टनल रोड प्रोजेक्ट और निविदा की चर्चा
इस मुलाकात के समय को लेकर सबसे अधिक सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि बेंगलुरु में हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक प्रस्तावित अरबों रुपये की बहुचर्चित टनल रोड परियोजना चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हुई है, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में सामने आई है। हालांकि इस टनल प्रोजेक्ट के लिए टेंडर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी बाकी है, लेकिन निविदा के नतीजों और मुख्यमंत्री के साथ हुई इस निजी मुलाकात के बीच के तालमेल ने विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। विपक्ष का तर्क है कि यह मुलाकात केवल चाय पर चर्चा नहीं, बल्कि परियोजना को जल्द से जल्द हरी झंडी देने की एक गुप्त कोशिश हो सकती है।
बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा हमला
मुलाकात की खबरें सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि क्या राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को अदाणी समूह के मालिक से मिलने की अनुमति दी थी। आर. अशोक ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी का दोहरा चरित्र जनता के सामने है, क्योंकि जहां एक ओर राहुल गांधी दिल्ली में अदाणी के खिलाफ सड़क से संसद तक विरोध करते हैं, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार उनके लिए रेड कार्पेट बिछाने में व्यस्त है। उन्होंने राहुल गांधी को व्यंग्यात्मक सलाह देते हुए कहा कि उन्हें बेंगलुरु आकर उन पेड़ों को भी देखना चाहिए जिन्हें इस सुरंग सड़क परियोजना के निर्माण के दौरान काटे जाने की संभावना है।
प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ता विरोध
बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या के समाधान के रूप में प्रस्तावित यह सुरंग सड़क परियोजना शुरुआत से ही विवादों के घेरे में रही है। भाजपा इसे लेकर लगातार सरकार का विरोध कर रही है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने तो इस पूरे टनल प्रोजेक्ट के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है। ऐसे में मुख्यमंत्री और गौतम अदाणी के बीच हुई यह मुलाकात राज्य की राजनीति को और अधिक गरमाएगी, क्योंकि अब विपक्षी दल इसे सरकार की संलिप्तता के प्रमाण के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा कर्नाटक विधानसभा के पटल पर भी जोर-शोर से उठने के पूरे आसार हैं।
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