राष्ट्रीय राजनीति
6 घंटे पहले
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पूर्व राजदूत का चुनाव आयोग से तीखा सवाल
भारत के पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के रूप में जाना जाता है, पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए हैं। यूएई, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके नवदीप सूरी ने हाल ही में पंजाब में अपने व्यक्तिगत अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने चुनाव आयोग से यह महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा है कि यदि एक पूर्व राजदूत को अपनी भारतीय नागरिकता प्रमाणित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, तो आम नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया कितनी जटिल होगी।
क्या है पूरा मामला
नवदीप सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट के माध्यम से बताया कि वे SIR प्रक्रिया के तहत अपने संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO से मिले थे। उस दौरान उन्होंने अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड अधिकारियों को सौंपा था। शुरुआती जांच में उन्हें बताया गया कि उनके सभी दस्तावेज पूरी तरह से सही और मान्य हैं। हालांकि, स्थिति तब बदली जब उन्हें एक वॉलंटियर का संदेश प्राप्त हुआ। इस संदेश में उन्हें सूचित किया गया कि उनके कुछ विवरण वर्ष 2003 की पुरानी मतदाता सूची के डेटा से मेल नहीं खा रहे हैं।
नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस
इस जानकारी के बाद पूर्व राजदूत ने पुनः BLO से संपर्क साधा। सूरी के अनुसार, उन्हें दोबारा बुलाया गया और एक औपचारिक नोटिस थमाया गया। इस नोटिस में उनसे ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की गई, जो आधिकारिक तौर पर उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि कर सकें। यह घटना उनके लिए काफी हैरानी भरी थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया कि वर्ष 2003 के दौरान वह भारत में नहीं थे, क्योंकि वह उस समय अपनी आधिकारिक राजनयिक जिम्मेदारियों के चलते विदेश में तैनात थे। इसके बाद उनसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट की मांग की गई।
आम नागरिक की स्थिति पर जताई चिंता
नवदीप सूरी ने इस प्रक्रिया पर गहरी असहमति जताई। हालांकि उन्होंने यह उल्लेख किया कि उनके पास वोटर आईडी और आधार कार्ड के अलावा भी पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं, जिनकी मदद से वह अपनी स्थिति स्पष्ट करने में सक्षम हैं, लेकिन उन्होंने उन लोगों के बारे में चिंता व्यक्त की जिनके पास सीमित संसाधन या दस्तावेज हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिसने तीन अलग-अलग देशों में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व किया है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी? क्या चुनाव आयोग की यह प्रणाली इतनी त्रुटिपूर्ण है कि यह एक भारतीय नागरिक को बार-बार अपनी पहचान का प्रमाण देने के लिए मजबूर करती है?
क्या है SIR की प्रक्रिया
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR चुनाव आयोग द्वारा संचालित एक व्यापक अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर की मतदाता सूची को अपडेट करना, त्रुटियों को सुधारना और पात्र मतदाताओं के नाम को सुनिश्चित करना है। यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है ताकि लोकतंत्र में हर पात्र व्यक्ति मतदान के अधिकार का उपयोग कर सके। हालांकि, नवदीप सूरी द्वारा उठाए गए इन सवालों ने दस्तावेज मिलान और पुरानी मतदाता सूचियों के साथ डेटा की विसंगतियों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर चुनाव आयोग को भविष्य में गौर करने की आवश्यकता हो सकती है।
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