हुंडई कार प्लांट में रोबोट बनाम इंसान का विवाद, कंपनी को हो सकता है 1290 करोड़ का भारी नुकसान विश्व 5 घंटे पहले 3
दक्षिण कोरिया स्थित हुंडई के कारखाने में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर उतर आए हैं, जिससे कंपनी को करोड़ों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

ऑटोमोबाइल जगत में अनोखा टकराव

ऑटोमोबाइल उद्योग के इतिहास में पहली बार इंसानों और रोबोट के बीच का टकराव इतना गहरा गया है कि एक प्रमुख कार निर्माता कंपनी के प्लांट पर तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है। हुंडई के कारखानों में रोबोटिक्स और आधुनिक ऑटोमेशन को लागू करने की योजना के खिलाफ वहां के कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण कंपनी को भारी आर्थिक चोट पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जो सीधे तौर पर कंपनी के उत्पादन और मुनाफे को प्रभावित कर रही है।

एटलस रोबोट की एंट्री पर घमासान

विवाद की मुख्य वजह हुंडई की वह योजना है, जिसके तहत कंपनी अपने प्रोडक्शन लाइन पर एटलस नाम के इंसानी शक्ल वाले रोबोट तैनात करने जा रही है। इन उन्नत रोबोट्स को प्रसिद्ध रोबोटिक्स कंपनी बोस्टन डायनेमिक्स ने विकसित किया है। हुंडई यूनियन, जो करीब 40 हजार कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना कर्मचारियों की सहमति के इन रोबोट्स को कारखाने के भीतर कदम नहीं रखने दिया जाएगा।

उत्पादन ठप्प और 1290 करोड़ का नुकसान

मई महीने से चल रही बातचीत जब किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी, तो दक्षिण कोरिया के उल्सान प्लांट में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। परिणाम यह हुआ कि आक्रोशित कर्मचारियों ने रोजाना 4 घंटे की आंशिक हड़ताल का रास्ता चुन लिया। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्मचारियों की इस हड़ताल के कारण कारों का उत्पादन लगभग 5 हजार यूनिट तक कम हो सकता है। यदि उत्पादन में यह गिरावट जारी रहती है, तो हुंडई को 13.4 करोड़ डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 1290 करोड़ रुपए से ज्यादा का बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें

यूनियन के सेक्रेटरी जनरल ब्युन जुन-ह्वान ने कंपनी के सामने अपनी मांगे मजबूती से रखी हैं। उनका कहना है कि वे तकनीकी विकास या ऑटोमेशन के पूरी तरह विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे अपनी आजीविका और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • एआई और रोबोट के आने से किसी भी कर्मचारी की नौकरी न जाने की लिखित गारंटी दी जाए।
  • उत्पादन लाइन पर काम करने वाले मजदूरों के लिए घंटे के हिसाब से मिलने वाली मजदूरी को हटाकर एक निश्चित मासिक वेतन प्रणाली लागू की जाए।
  • कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र को वर्तमान 60 साल से बढ़ाकर 65 साल किया जाए।
  • रोबोट को काम पर लगाने से पहले कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अमेरिका में क्या है स्थिति

हुंडई ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि दक्षिण कोरियाई प्लांट्स में ये रोबोट कब से काम करना शुरू करेंगे। हालांकि, कंपनी ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका के जॉर्जिया में स्थित उनके मेटाप्लांट में साल 2028 तक एटलस रोबोट का संचालन शुरू हो जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका के इस विशिष्ट प्लांट में कोई वर्कर्स यूनियन नहीं है, जिसके चलते वहां कंपनी को इस तरह के प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा है। यह टकराव ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में आने वाले समय में तकनीक और मानव श्रम के बीच के संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस खड़ा करता है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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