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4 दिन पहले
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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद खाड़ी क्षेत्र से दुनिया तक तेल पहुंचाने के लिए एक नया समुद्री रास्ता तैयार कर लिया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ सैटेलाइट तस्वीरों की पड़ताल की है, जिनमें ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट के निकट खुले समुद्र में बड़े पैमाने पर एक जहाज से दूसरे जहाज (Ship-to-Ship) में तेल ट्रांसफर किया जाता दिख रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस पूरे ऑपरेशन पर अमेरिकी सेना नजर रख रही थी, हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 2 मई से 11 जून के बीच ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में फुजैराह (UAE) और ओमान के सोहर बंदरगाह के पास दर्जनों तेल टैंकर एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आए। इन जहाजों के बीच कई घंटों तक समुद्र में ही तेल का स्थानांतरण होता रहा। 9 जून को ली गई तस्वीरों में 12 जोड़ी टैंकर एक साथ काम करते दिखे, जबकि 11 जून तक यह संख्या बढ़कर 17 जोड़ी जहाजों तक पहुंच गई। दावा है कि मई की शुरुआत से अब तक इस नेटवर्क में 116 से ज्यादा जहाज जुड़ चुके हैं।
कैसे होता है तेल का ट्रांसफर
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले छोटे टैंकर तय की गई जगह पर पहुंचते हैं। इसके बाद वे ईरान के दावे वाले समुद्री क्षेत्र से बाहर निकलकर बड़े वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) के साथ जुड़ते हैं। एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल भरने की यह प्रक्रिया 24 से 40 घंटे तक चलती है। इसके बाद बड़े टैंकर दुनिया के अलग-अलग देशों के लिए रवाना हो जाते हैं।
रॉयटर्स ने सैटेलाइट तस्वीरों और शिपिंग डेटा के आधार पर अनुमान लगाया है कि मई की शुरुआत से अब तक इस नेटवर्क के जरिए करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद भेजे जा चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह वही शटलिंग तकनीक है, जिसका इस्तेमाल ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात करने के लिए करता रहा है।
अमेरिकी सेना की भूमिका पर दावे
रिपोर्ट में चार सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि 9 जून को ईरान की ओर से मार गिराए गए अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर का संबंध भी इसी तरह के एक मिशन से था। वहीं, एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की कोई भी सैन्य टुकड़ी इस समुद्री तेल ट्रांसफर ऑपरेशन में शामिल नहीं थी।
यह ऑपरेशन शुरू करने की नौबत क्यों आई
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने व्यावहारिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक ठप पड़ गया। सामान्य समुद्री रास्ता प्रभावित होने पर ही यह वैकल्पिक शिप-टू-शिप ट्रांसफर नेटवर्क खड़ा किया गया, ताकि खाड़ी देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह न रुके।
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