विश्व
6 घंटे पहले
2
विचारों
मियामी हादसे का भयावह मंजर और जांच
मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एमेजॉन का एक विशालकाय कार्गो विमान उस समय हादसे का शिकार हो गया जब वह रनवे से अनियंत्रित होकर बाहर निकल गया। बोइंग 767 विमान रनवे की सीमा को पार करते हुए आगे बढ़ा और वहां करीब 1,300 फीट की दूरी पर खड़ी एक वैन से जा टकराया। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि वहां मौजूद सफाई करने वाले दल के 5 सदस्यों की जान चली गई। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड यानी NTSB ने अपनी हालिया जांच रिपोर्ट में इस घटना के पीछे के उन रहस्यों से पर्दा उठाया है, जिसने पूरे विमानन जगत को झकझोर कर रख दिया है। घटना के 5 दिन बाद सामने आए ये तथ्य कॉकपिट के भीतर की उस अफरा-तफरी को बयां करते हैं, जिसने अंततः एक बड़े हादसे को अंजाम दिया।
कॉकपिट में 120 सेकंड तक मची रही खलबली
जांच रिपोर्ट के अनुसार, विमान की लैंडिंग से ठीक पहले कॉकपिट का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। तेज हवाओं ने विमान के रास्ते में भारी बाधा उत्पन्न की थी, जिससे विमान का संतुलन बिगड़ रहा था। इस बीच कॉकपिट के भीतर का सन्नाटा एक डरावनी चेतावनी से टूट रहा था, जिसमें एक पायलट लगातार चिल्ला रहा था कि विमान की रफ्तार बहुत अधिक है। यह चेतावनी कोई मामूली संदेश नहीं थी, बल्कि पूरे 120 सेकंड तक कॉकपिट में 'टू फास्ट' की गूंज सुनाई देती रही। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी चेतावनियों के बावजूद स्थिति को क्यों नहीं संभाला गया?
ब्लैक बॉक्स में दर्ज हुई चुप्पी की दास्तान
NTSB द्वारा जांचे गए कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर यानी CVR डेटा से जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। हादसे के वक्त विमान की कमान 55 वर्षीय कैप्टन जोसेफ कैरोल और 37 वर्षीय फर्स्ट ऑफिसर जेमी फेलिप सिल्वा मोलिना के हाथों में थी। ’21 एयर’ कंपनी द्वारा संचालित इस एमेजॉन मालवाहक जहाज के उतरने के दौरान कॉकपिट के ऑटोमेटेड सेफ्टी सिस्टम लगातार सक्रिय थे। अलार्म 'सिंक रेट' और 'टू लो टेरेन' की चेतावनी दे रहे थे। इन सबके साथ ही, एक पायलट बार-बार दूसरे को विमान की अत्यधिक गति के प्रति सचेत कर रहा था। हालांकि, ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस पायलट को यह सख्त चेतावनी दी जा रही थी, उसने लगभग दो मिनट तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उसकी यह चुप्पी या तो खतरे की गंभीरता को समझने में विफलता थी या फिर किसी गहरी असमंजस की स्थिति का परिणाम।
विमान की लैंडिंग और 4 सेकंड का घातक निर्णय
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और फ्लाइटराडार24 से मिले आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि यह हादसा केवल तेज रफ्तार का नतीजा नहीं था, बल्कि कॉकपिट में लिए गए गलत फैसलों की एक श्रृंखला थी। मियामी हवाई अड्डे का रनवे नंबर 30 करीब 9,360 फीट लंबा है, लेकिन उस दिन अस्थिर हवाओं ने लैंडिंग को बहुत कठिन बना दिया था। बोइंग 767 विमान को रनवे की शुरुआत में उतरना चाहिए था, लेकिन वह वहां से करीब 5,000 फीट की दूरी पर जाकर जमीन को छू पाया। इसका मतलब यह था कि जहाज को रोकने के लिए रनवे पर बहुत कम जगह बची थी।
इसी बीच, पायलटों ने एक और बड़ी भूल कर दी। रनवे पर उतरते ही उन्हें स्थिति की भयावहता का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत ब्रेक छोड़कर विमान को वापस हवा में ले जाने यानी 'गो-अराउंड' का प्रयास किया। लेकिन मात्र 4 सेकंड बाद ही उन्होंने यह निर्णय बदल लिया। उन्होंने थ्रोटल को वापस खींच लिया और पूरी ताकत के साथ ब्रेक दबाने शुरू कर दिए। ये 4 सेकंड का असमंजस और भ्रम भारी-भरकम विमान को सुरक्षित रोकने की बची-खुची उम्मीदों पर पानी फेरने के लिए पर्याप्त था।
रनवे के बाहर तबाही और मौतों का सिलसिला
जब तक ब्रेक का प्रभाव विमान की गति पर पड़ता, तब तक बोइंग 767 रनवे की तय सीमा को पार कर चुका था। तेज गति में जमीन को घसीटता हुआ यह विशाल मालवाहक विमान रनवे के अंत से 1,300 फीट आगे निकल गया। दुर्भाग्यवश, वहां एयरपोर्ट का सफाई कर्मचारी दल अपनी वैन के साथ मौजूद था। विमान ने सीधे उस वैन को टक्कर मार दी, जिससे वह पूरी तरह नष्ट हो गई और उसमें सवार 5 कर्मचारियों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। NTSB की प्रमुख जेनिफर होमेंडी के मुताबिक, ये सभी मृतक एयरपोर्ट के प्लेन क्लीयरिंग क्रू का हिस्सा थे। हादसे में 5 अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से 2 की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। विमान में सवार दोनों पायलटों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां दोनों पायलटों से पूछताछ कर रही हैं ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा नियमों और कॉकपिट प्रबंधन पर सवाल
इस दुखद घटना ने कार्गो ऑपरेशन्स के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट की विफलता का एक बड़ा उदाहरण है। तेज हवाओं और अस्थिर अप्रोच की स्थिति में, मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए पायलटों को जबरन लैंडिंग करने के बजाय विमान को हवा में ही वापस मोड़ लेना चाहिए था। कॉकपिट में तालमेल की कमी और बार-बार मिल रही चेतावनियों के प्रति बरती गई लापरवाही इस हादसे की मुख्य वजह बनी। फिलहाल NTSB की टीम इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और अभी तक कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की पूरी ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कोई मानसिक दबाव या तकनीकी खराबी थी, जिसने पायलट की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
Comments
0 comment