अंतरिक्ष से आया 300 टन बारूद जितना गोला, 68,000 की रफ्तार से धरती की ओर, वायुमंडल ने कैसे बचाया? विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिका के आसमान में 68,000 किमी/घंटे की रफ्तार से आए एक छोटे उल्कापिंड के फटने से करीब 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली। वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी का वायुमंडल एक ढाल की तरह इन पिंडों को हवा में ही जलाकर खतरा टाल देता है।

अंतरिक्ष के विशाल शून्य में अनगिनत चट्टानें तैरती रहती हैं और जब इनमें से कोई पृथ्वी के वायुमंडल से टकराती है तो आसमान में किसी परमाणु धमाके जैसी ऊर्जा छूटती है। हाल ही में अमेरिका के मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा पर एक रहस्यमयी और बेहद तीव्र धमाके ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा। नासा के विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह डरावनी आवाज न तो किसी सैन्य परीक्षण की थी और न ही किसी विमान की, बल्कि अंतरिक्ष से आए 3 से 5 फुट चौड़े एक उल्कापिंड के सोनिक बूम की थी।

कैसे हुआ हवा में जोरदार धमाका

जब यह उल्कापिंड करीब 68,000 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी गति से पृथ्वी के घने वायुमंडल में घुसा तो हवा के भीषण घर्षण ने इसकी गतिज ऊर्जा को अत्यधिक गर्मी में बदल दिया। पृथ्वी की सतह से लगभग 60 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचते ही यह चट्टान दबाव सह नहीं पाई और इसमें जबरदस्त विस्फोट हो गया।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस घटना में लगभग 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा मुक्त हुई, जिसने हवा में एक तीव्र शॉक वेव यानी सोनिक बूम पैदा किया। राहत की बात यह रही कि इसका अधिकांश हिस्सा हवा में ही जलकर राख हो गया और बचे हुए अवशेष सुरक्षित रूप से केप कॉड बे के समंदर में जा गिरे। बीते कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं दर्ज होने के कारण वैज्ञानिकों ने इस दौर को सक्रिय उल्का मौसम करार दिया है।

खगोलीय घटना की 5 मुख्य बातें

  • 300 टन टीएनटी की ताकत: 30 मई 2026 को अमेरिकी आसमान में टूटे महज 3 से 5 फुट के उल्कापिंड ने हवा में 300 टन टीएनटी बारूद के फटने जितनी ऊर्जा पैदा की।
  • सोनिक बूम का विज्ञान: जब कोई खगोलीय पिंड ध्वनि की गति (1,225 किमी/घंटा) से तेज चलता है तो वह अपने आगे की हवा को बेहद दबा देता है, जिससे एक तीव्र शॉक वेव यानी धमाके की आवाज पैदा होती है।
  • 68,000 किमी/घंटे की रफ्तार: यह उल्कापिंड 42,000 मील प्रति घंटे (करीब 68,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से वायुमंडल में घुसा, जिससे घर्षण के कारण भारी गर्मी पैदा हुई।
  • टेक्सास में घर की छत टूटी: इससे पहले 21 मार्च को टेक्सास में गिरे एक अन्य उल्कापिंड ने 26 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा छोड़ी और एक घर की छत में 6 इंच का छेद कर दिया।
  • गैजेट्स बने मददगार: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन, डैशकैम और डिजिटल डोरबेल के चलते इन दुर्लभ अंतरिक्षीय घटनाओं का तुरंत लाइव डेटा वैज्ञानिकों तक पहुंच रहा है।

वैज्ञानिक विश्लेषण

सौरमंडल के निर्माण के समय से ही अंतरिक्ष में अरबों टन मलबा और एस्ट्रॉयड चक्कर लगा रहे हैं और पृथ्वी लगातार इसी मलबे के बीच से होकर गुजरती है। मार्च से लेकर मई 2026 तक यूरोप, लेक एरी और टेक्सास में लगातार उल्कापिंडों का गिरना और सोनिक बूम होना यह दर्शाता है कि पृथ्वी इस समय अंतरिक्ष के एक बेहद सक्रिय मलबे वाले क्षेत्र से गुजर रही है।

भले ही ये घटनाएं इंसानों को डराती हों, लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से ये पृथ्वी के सुरक्षा कवच यानी वायुमंडल की ताकत को साबित करती हैं। हमारा वायुमंडल एक अदृश्य ढाल की तरह काम करता है जो 7 टन वजनी (जैसे लेक एरी का उल्कापिंड) विशाल पत्थरों को भी सतह तक पहुंचने से पहले हवा में ही जलाकर राख कर देता है। इसके अलावा मार्च में यूरोप में गिरे मलबे के अध्ययन में वैज्ञानिकों को वेस्टा (Vesta) एस्ट्रॉयड के प्राचीन कण मिले हैं, जो सौरमंडल के इतिहास और ग्रहों की उत्पत्ति के अनसुलझे रहस्यों को खोलने की चाबी माने जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

सवाल 1: उल्कापिंड का ‘सोनिक बूम’ क्या होता है और यह आवाज क्यों आती है?

जब कोई उल्कापिंड ध्वनि की रफ्तार (1,225 किमी/घंटा) से कई गुना अधिक तेजी से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह अपने सामने मौजूद हवा को बेहद संकुचित कर देता है। हवा के इस भारी दबाव से एक अदृश्य और अत्यंत शक्तिशाली तरंग बनती है, जिसे शॉक वेव कहते हैं। जब यह तरंग हमारे कानों तक पहुंचती है तो बादलों के फटने या किसी बड़े बम धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है, इसे ही सोनिक बूम कहा जाता है।

सवाल 2: क्या इन अंतरिक्षीय उल्कापिंडों से पृथ्वी या इंसानों को कोई बड़ा खतरा है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक इन छोटे और मध्यम आकार के उल्कापिंडों से सीधे तौर पर किसी बड़े खतरे की आशंका बहुत कम होती है। पृथ्वी पर रोजाना कई टन अंतरिक्षीय धूल और छोटे पत्थर गिरते हैं, जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में ही जलकर भस्म हो जाते हैं। हालांकि टेक्सास जैसी घटना में कभी-कभी कोई छोटा टुकड़ा घरों की छतों को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन किसी बड़े विनाश की संभावना न के बराबर रहती है।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!