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59 मिनट पहले
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अमेरिका में नौकरी का सपना संजोने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. अमेरिकी अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की मोटी फीस वसूलने का ऐलान किया गया था. भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 85 लाख रुपये बैठती थी. इससे कुछ समय पहले ही अदालत ने भारत समेत कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को भी गलत करार दिया था.
बोस्टन की एक संघीय अदालत ने दो टूक कहा कि राष्ट्रपति अपने स्तर पर इस तरह का शुल्क तय नहीं कर सकते. इसकी वजह यह है कि यह कोई सामान्य फीस नहीं, बल्कि एक प्रकार का टैक्स है. अमेरिका में नया कर लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास सुरक्षित है.
2 हजार से 1 लाख डॉलर तक पहुंची थी फीस
यह विवाद उस समय खड़ा हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने अचानक H-1B वीजा का शुल्क कई गुना बढ़ा दिया. पहले कंपनियों को किसी विदेशी कर्मचारी के H-1B आवेदन पर करीब 2000 से 5000 डॉलर तक खर्च करने पड़ते थे, लेकिन नई व्यवस्था में यह राशि सीधे बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी गई.
ट्रंप प्रशासन की दलील थी कि कुछ कंपनियां H-1B वीजा का दुरुपयोग कर रही हैं. प्रशासन का कहना था कि विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखकर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनी जा रही हैं, इसलिए भारी शुल्क लगाकर इस पर रोक लगाना आवश्यक है.
फीस बढ़ते ही गिरा रजिस्ट्रेशन
इस नीति का असर तत्काल नजर आने लगा. कई कंपनियों ने H-1B वीजा के लिए आवेदन करना ही घटा दिया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नई फीस लागू होने के बाद फरवरी तक केवल 85 आवेदन ही जमा हो पाए थे. वहीं H-1B रजिस्ट्रेशन में भी करीब 38.5 फीसद की गिरावट दर्ज की गई.
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे इसे जुर्माना कहे या फीस, असल में यह एक टैक्स ही है. इसी आधार पर इसे कांग्रेस की स्वीकृति के बगैर लागू नहीं किया जा सकता.
भारतीयों को मिलेगी सबसे बड़ी राहत
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा, क्योंकि H-1B वीजा हासिल करने वालों में भारतीय पेशेवरों की संख्या सबसे अधिक रहती है. हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, डॉक्टर और अन्य कर्मचारी इसी वीजा के सहारे अमेरिका में काम करने जाते हैं. ट्रंप की नई नीति से भारतीयों और अमेरिकी कंपनियों, दोनों की चिंता बढ़ गई थी. भारत सरकार ने भी यह मसला अमेरिका के समक्ष उठाया था.
अब अदालत का फैसला आने के बाद कंपनियों और H-1B वीजा के इच्छुक हजारों भारतीयों ने राहत की सांस ली है. साफ शब्दों में कहें तो ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा को इतना महंगा बना देना चाहता था कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती कम कर दें. लेकिन अदालत ने इस कदम पर रोक लगाकर फिलहाल विदेशी प्रतिभाओं के लिए अमेरिका का रास्ता खुला रखा है.
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